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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 145

Witnesses to character

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

कानून में चरित्र-संबंधी साक्ष्य को सावधानी से परखा जाता है, क्योंकि किसी व्यक्ति की साख पर राय पक्षपाती, अफ़वाह-आधारित या अपूर्ण हो सकती है। ऐसी गवाही की विश्वसनीयता और न्यायसंगतता जाँचने के लिए कानून सुनिश्चित करता है कि चरित्र-गवाह सवालों से परे न रहें—वे तथ्यात्मक गवाहों की तरह ही जिरह और पुनः-पूछताछ की प्रक्रिया से गुजरते हैं, जिससे अदालतें उनके बयानों की विश्वसनीयता और आधार का आकलन कर सकें।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

भारतीय अदालतों ने प्रायः इसे प्रक्रियात्मक स्पष्टीकरण माना है, न कि बड़े विवाद का स्रोत, क्योंकि गवाहों से जिरह और पुनः-पूछताछ का अधिकार साक्ष्य-कानून के तहत पहले से ही एक सामान्य सिद्धांत है। अदालतों ने इस प्रावधान (और उसके पूर्ववर्ती Indian Evidence Act, 1872 की Section 140) पर भरोसा करके स्पष्ट किया है कि चरित्र-गवाहों को सवालों से कोई विशेष छूट नहीं है, और उनकी गवाही पर भरोसा करने से पहले उसे किसी अन्य मौखिक साक्ष्य की तरह परखा जाना चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: चरित्र-गवाह सिर्फ़ अपनी राय बताते हैं और उनसे आगे सवाल नहीं किए जा सकते—यह कथन ग़लत है।

    तथ्य: इस प्रावधान के तहत, चरित्र-गवाहों से विरोधी पक्ष जिरह कर सकता है और जिसने उन्हें बुलाया है वह पक्ष पुनः-पूछताछ कर सकता है—ठीक वैसे ही जैसे किसी अन्य गवाह के साथ होता है।