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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 13

Facts bearing on question whether act was accidental or intentional

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह नियम भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 15 से विकसित हुआ है, जिसे अंग्रेजी समान्य विधि के ‘समान प्रकृति के कृत्यों के साक्ष्य’ (similar fact evidence) के विचार ने आकार दिया। न्यायालयों ने माना कि एक अकेला संदिग्ध कृत्य, अलग‑थलग देखे जाने पर, संयोग या दुर्घटना बताकर टाला जा सकता है; पर जब वही तरह‑का कृत्य अलग समय, स्थान या पीड़ितों पर दोहरता है, तो उसका पैटर्न स्वयं ही आशय या दोषपूर्ण ज्ञान का संकेत बन जाता है और निर्दोष स्पष्टीकरण को खारिज करता है। यह प्रावधान निष्पक्षता (यह व्यक्ति को स्वतः दोषी नहीं ठहराता) और व्यावहारिक प्रमाण (पैटर्न मायने रखता है) के बीच संतुलन बनाता है—जैसे बीमा धोखाधड़ी, बार‑बार गलत हिसाब‑किताब, या जाली मुद्रा फैलाने के मामलों में।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

यह प्रावधान भारतीय न्यायालयों में लंबे समय से मान्य सिद्धान्त को आगे बढ़ाता है, जो साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 15 में निहित था और अंग्रेजी वाद Makin v. Attorney-General for New South Wales (1894) के तर्क से मेल खाता था, जहाँ बार‑बार का समान आचरण दुर्घटना या संयोग को खारिज करने हेतु प्रासंगिक माना गया। भारतीय न्यायालयों ने इस ‘संभावनाओं के सिद्धान्त’ (doctrine of chances) को सतर्कता से लागू किया है, चेतावनी देते हुए कि ऐसा साक्ष्य निश्चितता नहीं बल्कि संभावना दिखाता है—यह दुर्घटना की धारणा को हटाने में मदद करता है, परंतु इसे अन्य समस्त साक्ष्यों के साथ तौलकर ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वतः दोष सिद्धि मान लिया जाए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: समान कृत्यों का एक पैटर्न दिखा देने से स्वतः यह सिद्ध हो जाता है कि इस बार व्यक्ति दोषी है।

    तथ्य: कानून ऐसे पैटर्न्स को केवल ‘प्रासंगिक’ बनाता है—अर्थात न्यायालय उन्हें विचार में ले सकता है। दोष सिद्धि अब भी समस्त साक्ष्यों के समुच्चय से ही होनी चाहिए; केवल पैटर्न के आधार पर नहीं।

  • मिथक: यह नियम न्यायालयों को किसी व्यक्ति को उसके अतीत के असंबंधित बुरे व्यवहार के लिए दंडित करने देता है।

    तथ्य: पूर्व कृत्य वास्तव में प्रकृति में समान होने चाहिए और उसी प्रकार के प्रश्न (दुर्घटना बनाम आशय) से जुड़े होने चाहिए; केवल व्यक्ति को बदनाम करने हेतु कोई भी पुराना दुराचार नहीं लाया जा सकता।