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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 531

Repeal and savings

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जब भी कोई बड़ा क़ानून बदला जाता है, अव्यवस्था का वास्तविक ख़तरा रहता है—हज़ारों लंबित मामले, जारी आदेश और लाइसेंस अचानक कानूनी आधार से विहीन हो सकते हैं। यह ‘निरसन और संरक्षण’ प्रावधान एक मानक कानूनी सुरक्षा तंत्र है: यह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 को सुव्यवस्थित ढंग से रद्द करता है और निरंतरता सुनिश्चित करता है, ताकि चल रहे विचारण बाधित न हों, सरकार की मौजूदा अधिसूचनाएँ और न्यायालयी आदेश वैध बने रहें, और जो व्यक्ति पुरानी क़ानून के अधीन समय-सीमा चूक चुके थे, वे केवल इस कारण दूसरा अवसर न पा जाएँ कि नए क़ानून में समय-सीमा लंबी है। जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) लागू हुई, तभी इस प्रावधान ने औपचारिक रूप से 1973 की संहिता का संचालन समाप्त किया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पुरानी संहिता के निरस्त होते ही सभी लंबित मामलों को नई संहिता के तहत दोबारा शुरू करना अनिवार्य है।

    तथ्य: जब नई संहिता लागू हुई, तब जो मामले पहले से लंबित थे, वे नई क़ानून के तहत दोबारा शुरू नहीं किए जाते, बल्कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत ही संचालित होते रहते हैं।