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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 521

Delivery to commanding officers of persons liable to be tried by Court-martial

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सशस्त्र बलों के सदस्य साधारण दंड विधि के साथ-साथ अपने विशिष्ट क़ानूनों (जैसे आर्मी एक्ट) के अधीन भी होते हैं; इसलिए एक ही कृत्य का परीक्षण कभी नागरिक न्यायालय में तो कभी कोर्ट-मार्शल में हो सकता है। यह अनुभाग नागरिक मजिस्ट्रेटों और सैन्य प्राधिकारियों के बीच भ्रम और अधिकार-संघर्ष से बचने के लिए यह स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करता है कि मुकदमा किस मंच पर चलेगा और जब कोर्ट-मार्शल उपयुक्त मंच हो, तब अभियुक्त को कैसे सुपुर्द किया जाए। यह वही व्यवस्था आगे बढ़ाता है जो पहले दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 475 में थी, और औपनिवेशिक कालीन आपराधिक प्रक्रिया से चली आ रही दीर्घकालीन पद्धति को प्रतिबिंबित करता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सैनिकों का मुकदमा कभी भी साधारण आपराधिक न्यायालय में नहीं चल सकता।

    तथ्य: सैनिकों का परीक्षण सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार या तो साधारण आपराधिक न्यायालय में या कोर्ट-मार्शल में हो सकता है; यह अनुभाग केवल तब की सुपुर्दगी-प्रक्रिया को संचालित करता है जब कोर्ट-मार्शल चुना गया मंच हो।