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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 511

Finding or sentence when reversible by reason of error, omission or irregularity

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

आपराधिक विचारण में अनेक दस्तावेज़ और प्रक्रिया-चरण होते हैं, और छोटी-मोटी लिपिकीय या तकनीकी त्रुटियाँ लगभग अनिवार्य हैं। यह प्रावधान ऐसी निष्पक्ष सुनवाई से निकले अंतिम निर्णयों को तुच्छ काग़ज़ी खामियों के कारण उलट-पुलट होने से बचाता है, और पक्षकारों को आपत्तियाँ दबाकर रखने तथा प्रतिकूल निर्णय के बाद ही उठाने से हतोत्साहित भी करता है। यह पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 465 से मेल खाता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समकक्ष दंड प्रक्रिया संहिता प्रावधान के अंतर्गत न्यायालयों ने बार-बार रेखांकित किया है कि ‘न्याय-विफलता’ की कसौटी और आपत्ति उठाने का समय—दोनों—महत्व रखते हैं; जो खामी अपील में पहली बार उठाई जाती है, जबकि पक्षकार विचारण भर चुप रहा, उसे उस खामी की तुलना में कहीं अधिक संदेह की दृष्टि से देखा जाता है जिसे तुरंत, और समय रहते, उठाया गया हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: न्यायालयी दस्तावेज़ों में कोई भी लिपिकीय त्रुटि अपील में दोषसिद्धि पलटने का स्वतः आधार है।

    तथ्य: त्रुटि से वास्तव में न्याय-विफलता होना चाहिए, और अदालतें यह भी आँकती हैं कि आपत्ति यथासंभव जल्दी, उचित समय पर उठाई गई थी या नहीं।