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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 435

Abatement of appeals

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

अपील मूलतः जीवित व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए होती है; जैसे ही वह व्यक्ति मर जाता है, अधिकांश अपीलों का उद्देश्य समाप्त हो जाता है क्योंकि अब न तो किसी को दंडित किया जा सकता है, न बरी किया जा सकता है, न सजा बदली जा सकती है। लेकिन जहां मृत्यु-दंड या कारावास (और दोषसिद्धि का कलंक) शामिल हो, वहां कानून परिवारजनों को दिवंगत का नाम साफ करने के लिए अपील जारी रखने की अनुमति देता है, यह मानते हुए कि प्रतिष्ठा और गरिमा मृत्यु के बाद भी महत्व रखती है। यह पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 394 से मेल खाती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना कि अपीलकर्ता की मृत्यु होते ही हर अपील हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है—गलत है।

    तथ्य: जहां अपील मृत्यु-दंड या कारावास से संबंधित हो, वहां कोई निकट संबंधी तीस दिनों के भीतर अपील जारी रखने का आवेदन कर सकता है और यदि न्यायालय अनुमति (लीव) दे दे, तो अपील का अवसान नहीं होता।