Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 403
Court not to alter judgment
Save as otherwise provided by this Sanhita or by any other law for the time being in force, no Court, when it has signed its judgment or final order disposing of a case, shall alter or review the same except to correct a clerical or arithmetical error.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह नियम निर्णयों की अंतिमता की रक्षा करता है। एक बार न्यायालय ने मामला तय कर दिया और निर्णय पर हस्ताक्षर कर दिए, तो दोनों पक्षों को यह निश्चितता चाहिए कि निर्णय बना रहेगा—वरना सुनवाईयाँ अनिश्चितकाल तक चल सकती हैं क्योंकि न्यायाधीश बार‑बार अपने ही आदेशों पर पुनर्विचार करते रहेंगे। लिपिकीय या अंकगणितीय चूक के संकुचित अपवाद से न्यायालय बिना मामले के मर्म को खोले स्पष्ट टाइपो या संख्या‑सम्बंधी गलती सुधार सकता है। यह एक दीर्घकालिक नियम है जो CrPC, 1973 की धारा 362 से बड़े पैमाने पर अपरिवर्तित रूप में जारी है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि किसी न्यायाधीश को बाद में लगे कि उनका निर्णय गलत था, तो वे निर्णय में संशोधन कर सकते हैं।
तथ्य: किसी हस्ताक्षरित निर्णय के मर्म की न्यायाधीश द्वारा समीक्षा या परिवर्तन नहीं किया जा सकता—केवल लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटियाँ सुधारी जा सकती हैं; किसी वास्तविक परिवर्तन के लिए अपील या उच्चतर न्यायालय में पुनरीक्षण का मार्ग अपनाना होगा।