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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 252

Conviction on plea of guilty

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

दोष स्वीकार करने से, जब अभियुक्त स्वयं अपराध मान लेता है, तो पूर्ण विचारण से बचकर न्यायालय का समय और संसाधन बचते हैं। परंतु चूंकि सत्र वाद प्रायः गम्भीर अपराधों से जुड़े होते हैं, कानून न्यायाधीश को स्वविवेक देता है—स्वतः दोषसिद्धि नहीं होती; यदि स्वीकारोक्ति संदिग्ध, अस्पष्ट या वास्तविक रूप से स्वेच्छिक न लगे, तो न्यायाधीश साक्ष्य पर जोर दे सकता है। यह पहले के फौजदारी प्रक्रिया संहिता की धारा 229 के अनुरूप है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि आप दोष स्वीकार करें, तो न्यायाधीश को आपको तुरंत दोषी ठहराना ही होगा।

    तथ्य: न्यायाधीश के पास विवेकाधिकार है—दोष स्वीकारोक्ति पर दोषसिद्धि वैकल्पिक है, स्वचालित नहीं।