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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 189

Release of accused when evidence deficient

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान पूर्ववर्ती दण्ड प्रक्रिया संहिता (Section 169) में निहित सिद्धांत को आगे बढ़ाता है कि जब पुलिस जाँच अभियोजन के लिए पर्याप्त आधार न होने को दर्शाती है, तो व्यक्ति को अभिरक्षा में नहीं रखा जाना चाहिए। यह कमज़ोर या अधूरी सामग्री के आधार पर अनिश्चितकालीन निरुद्ध रखने से रोककर व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जबकि यदि नए साक्ष्य या प्रगति सामने आएँ तो न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित रखने के लिए व्यक्ति को उत्तरदायी भी रखता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने परंपरागत रूप से रेखांकित किया है कि इस प्रकार का प्रावधान न तो बरी करना है और न ही मामले का अंतिम समापन — इसका अर्थ केवल यह है कि उस चरण पर पुलिस को अपर्याप्त साक्ष्य मिला। यदि जाँच फिर से खोली जाए या नए साक्ष्य सामने आएँ तो व्यक्ति को बाद में बुलाया जा सकता है। पुरानी दण्ड प्रक्रिया संहिता के Section 169 के अंतर्गत, न्यायालयों ने स्पष्ट किया कि बंधपत्र पर रिहाई आगे की जाँच या नए सामग्री मिलने पर eventual trial (अंततः मुकदमा) को नहीं रोकती।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इस नियम के तहत रिहा होना यह सिद्ध कर देना नहीं है कि व्यक्ति निर्दोष है।

    तथ्य: इसका अर्थ केवल इतना है कि उस समय मुकदमे को आगे बढ़ाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे — यह औपचारिक रूप से निर्दोष ठहराना नहीं है, और यदि नया साक्ष्य सामने आए तो मामला फिर से खोला जा सकता है।