Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 108
Magistrate may direct search in his presence
Any Magistrate may direct a search to be made in his presence of any place for the search of which he is competent to issue a search-warrant.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
सामान्यतः जब तलाशी की आवश्यकता होती है, तो मजिस्ट्रेट पुलिस या किसी अन्य अधिकारी को अधिकृत करते हुए वारंट जारी करता/करती है। पर कभी‑कभी मजिस्ट्रेट को लगता है कि तलाशी इतनी संवेदनशील या महत्वपूर्ण है कि उसे पूरी तरह दूसरों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए—जैसे साक्ष्य से छेड़छाड़ रोकने, निष्पक्षता सुनिश्चित करने, या जो मिला है उसका स्वयं सत्यापन करने के लिए। पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 103 से आई यह व्यवस्था मजिस्ट्रेट को यह विकल्प देती है कि वारंट के माध्यम से पूरी तरह प्रत्यायोजित करने के बजाय वह सीधे उपस्थित होकर तलाशी की निगरानी करे।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
इस संकीर्ण प्रावधान की अकेले में व्याख्या करने वाला कोई बड़ा नज़ीरनुमा निर्णय नहीं है, क्योंकि यह बस मजिस्ट्रेट की मौजूदा वारंट शक्ति का विस्तार करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति की भी अनुमति देता है। न्यायालयों ने सामान्यतः इसे एक सुरक्षा‑उपबंध माना है—तलाशी और जब्ती से जुड़े व्यापक विधि‑समूह के साथ पढ़ा जाता है, जो मांग करता है कि हर तलाशी (चाहे वारंट से हो या मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में) उचित प्रक्रिया का पालन करे, जिस व्यक्ति की संपत्ति की तलाशी हो उसके अधिकारों का सम्मान हो, और विधिवत अभिलेखन हो, ताकि प्राप्त साक्ष्य विधिक रूप से विश्वसनीय रहे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कथन गलत है: केवल पुलिस अधिकारी ही तलाशी कर सकते हैं और मजिस्ट्रेट कभी व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होते—ऐसा नहीं है। यह धारा मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर तलाशी निर्देशित करने की अनुमति देती है।
तथ्य: यह धारा विशेष रूप से अनुमति देती है कि यदि किसी स्थान के लिए वारंट जारी करने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास है, तो वही मजिस्ट्रेट वहाँ उपस्थित रहकर स्वयं तलाशी का निर्देशन कर सकता/सकती है।
मिथक: यह कथन गलत है: हर तलाशी से पहले मजिस्ट्रेट का लिखित वारंट अनिवार्य नहीं है। कानून के तहत, कुछ स्थितियों में मजिस्ट्रेट स्वयं उपस्थित रहकर तलाशी का निर्देशन कर सकता/सकती है।
तथ्य: इस प्रावधान के अंतर्गत, मजिस्ट्रेट अलग से वारंट जारी किए बिना, उसी अधिकार का उपयोग करते हुए जो वह सामान्यतः वारंट जारी करने में करता/करती, स्वयं उपस्थित रहकर सीधे तलाशी का निर्देशन कर सकता/सकती है।