Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 4
Punishments
—The punishments to which offenders are liable under the provisions of this Sanhita are—
(a) Death;
(b) Imprisonment for life;
(c) Imprisonment, which is of two descriptions, namely:—
(1) Rigorous, that is, with hard labour;
(2) Simple;
(d) Forfeiture of property;
(e) Fine;
(f) Community Service.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान पुराने Indian Penal Code, 1860 की धारा 53 का स्थान लेता है और पारंपरिक दंड-क्रम को काफी हद तक यथावत रखते हुए उसे आधुनिक बनाता है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 ने ‘सामुदायिक सेवा’ को एक नई, सुधारात्मक दंड-विकल्प के रूप में जोड़ा, जो लघु अपराधों के लिए पुनर्स्थापनात्मक न्याय (restorative justice) की ओर झुकाव और उपनिवेशकालीन दौर की पुरानी सजाओं — मृत्युदंड, आजीवन कारावास, कारावास (कठोर या साधारण), संपत्ति की जब्ती और जुर्माना — के साथ कारागारों में भीड़ घटाने के उद्देश्य को दर्शाता है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
पूर्ववर्ती IPC प्रावधान के तहत, अदालतों ने यह तय करने पर व्यापक न्यायसिद्धांत विकसित किए कि कब मृत्युदंड या आजीवन कारावास लागू होगा; विशेष रूप से Bachan Singh v. State of Punjab (1980) में ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ सिद्धांत, और यह स्पष्ट करने वाले निर्णय कि आजीवन कारावास का अर्थ सामान्यतः प्राकृतिक जीवन के शेष भाग तक का कारावास है (Union of India v. V. Sriharan, 2015), जब तक उपयुक्त सरकारी कार्यवाही द्वारा उसे माफ या परिवर्तित न किया जाए। चूँकि ‘सामुदायिक सेवा’ नवनिर्दिष्ट है, इसलिए अदालतें और विधानमंडल अभी यह नियम विकसित कर रहे हैं कि किन विशिष्ट अपराधों में यह लगेगी और इसकी निगरानी कैसे होगी; अभी कोई स्थिर न्यायिक दृष्टांत-समूह स्थापित नहीं हुआ है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना कि सामुदायिक सेवा एक नरम ‘छुटकारा’ है जिसमें वास्तविक दंड नहीं होता — गलत है।
तथ्य: सामुदायिक सेवा एक औपचारिक विधिक दंड है, जिसे अदालत आदेशित करती है और जिसका पालन निर्देशानुसार करना अनिवार्य है; अनुपालन न करने पर अन्य दंड लगाए जा सकते हैं।
मिथक: यह कहना कि आजीवन कारावास हमेशा 14 या 20 जैसे निश्चित वर्षों का होता है — गलत है।
तथ्य: अदालतों ने स्पष्ट किया है कि आजीवन कारावास सामान्यतः दोषी के प्राकृतिक जीवन के शेष भाग तक का कारावास होता है, जब तक कि सरकार अपनी क्षमादान, रियायत (remission) या दंड-परिवर्तन (commutation) की शक्ति का प्रयोग न करे।