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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 253

Harbouring offender who has escaped from custody or whose apprehension has been

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान, जो पहले Indian Penal Code, 1860 की धारा 216 था, भागे हुए क़ैदी या वैध गिरफ़्तारी-आदेश के अधीन व्यक्ति को अधिकारियों से छिपाए रखने में सहायता करने पर दंड देता है, यह मानते हुए कि ऐसी शरण हिरासत और गिरफ़्तारी-आदेशों के प्रवर्तन को सीधे कमजोर करती है। सामान्य ‘आश्रय’ प्रावधान की तरह, इसमें भी पति-पत्नी के लिए दायित्व से छूट रखी गई है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: किसी भी रिश्तेदार को गिरफ़्तारी से बचाने में सहायता करना क़ानून द्वारा संरक्षित है, केवल पति-पत्नी ही नहीं।

    तथ्य: पति-पत्नी के लिए छूट सीमित है — यह केवल पति और पत्नी पर लागू होती है; चचेरे भाई, भाई-बहन या माता-पिता जैसे अन्य रिश्तेदार यदि भगोड़े को शरण देते हैं, तो उनके विरुद्ध अब भी अभियोजन हो सकता है।