Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 226
Attempt to commit suicide to compel or restrain exercise of lawful power
Whoever attempts to commit suicide with the intent to compel or restrain any public servant from discharging his official duty shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one year, or with fine, or with both, or with community service.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारत के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 ने सामान्य रूप से आत्महत्या के प्रयास को अपराध की बजाय मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा मानते हुए अपराधमुक्त कर दिया, और यह मान लिया कि व्यक्ति अत्यधिक तनाव में था। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), 2023 ने इस नीति को जारी रखा, पर एक संकीर्ण अपवाद रखा: जब आत्महत्या का प्रयास राज्य के विरुद्ध दबाव के औजार के रूप में किया जाए — जैसे किसी अधिकारी से कृपा करवाने, किसी को छुड़ाने, या किसी वैध कार्यवाही को छोड़ देने के लिए आत्म-हानि की धमकी देना। विधि-निर्माताओं ने यह अपवाद इसलिए रखा ताकि प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए आत्महत्या की धमकियों के दुरुपयोग को रोका जा सके, जबकि बाकी स्थितियों में ऐसे प्रयासों को सहानुभूति के साथ देखा जाए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
यह BNS में नया और संकीर्ण रूप से बनाया गया प्रावधान है, इसलिए अभी इस पर महत्वपूर्ण न्यायिक व्याख्या उपलब्ध नहीं है। फिर भी, इसकी पृष्ठभूमि पुराने भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अंतर्गत आत्महत्या के प्रयास के सामान्य अपराध पर最高 न्यायालय के पूर्व निर्णयों से आकार लेती है। P. Rathinam v. Union of India (1994) में, न्यायालय ने धारा 309 को असंवैधानिक ठहराते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में जबरन जीवित रखे जाने के विरुद्ध अधिकार भी निहित है। इसे Gian Kaur v. State of Punjab (1996) में संविधान पीठ ने पलट दिया और धारा 309 को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में अप्राकृतिक रूप से मरने का अधिकार शामिल नहीं है। इन बहसों ने अंततः नीति को इस दिशा में प्रभावित किया कि सामान्यतः आत्महत्या के प्रयास को अपराधमुक्त किया जाए, परंतु सार्वजनिक अधिकारियों के विरुद्ध दबाव के इस विशेष उपयोग के लिए दंड बनाए रखा जाए।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: भारत में आत्महत्या का प्रयास हमेशा अपराध है।
तथ्य: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के बाद और अब BNS के तहत, सामान्यतः आत्महत्या के प्रयास पर दंड नहीं दिया जाता। केवल इस विशिष्ट स्थिति में — यानी लोक सेवक को बाध्य करने या रोकने के उद्देश्य से आत्महत्या का प्रयास — अपराध बनता है और दंडनीय है।
मिथक: यह धारा उन लोगों को दंडित करती है जो कर्ज या दिल टूटने जैसी निजी व्यथा के कारण आत्मघाती हो जाते हैं।
तथ्य: यह कानून तभी लागू होता है जब प्रयास का उद्देश्य किसी लोक सेवक को उसकी आधिकारिक ड्यूटी करने के लिए बाध्य करना या उससे रोकना हो; निजी या व्यक्तिगत कारणों पर यह लागू नहीं होता।