Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 180
Possession of forged or counterfeit coin, Government stamp, currency-notes or bank-
Whoever has in his possession any forged or counterfeit coin, stamp, currency-note or bank-note, knowing or having reason to believe the same to be forged or counterfeit and intending to use the same as genuine or that it may be used as genuine, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both. Explanation.—If a person establishes the possession of the forged or counterfeit coin, stamp, currency-note or bank-note to be from a lawful source, it shall not constitute an offence under this section.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
नकली मुद्रा और जाली मुहरें धन-प्रणाली और शासन-तंत्र में जन-विश्वास को चोट पहुँचाती हैं, जिस पर अर्थव्यवस्था निर्भर करती है। औपनिवेशिक काल के क़ानून (Indian Penal Code धारा 243) ने पहली बार नकली सिक्कों और मुद्रा के कब्जे को अपराध माना ताकि जाली धन का प्रचलन रोका जा सके। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 ने इसे धारा 180 के रूप में आगे बढ़ाया, मूल संरक्षण को बनाए रखते हुए संहिता की संरचना को आधुनिक किया और मासूम-कब्जे के बचाव को स्पष्ट करने के लिए एक स्पष्ट व्याख्या जोड़ी।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
पहले के Indian Penal Code (धाराएँ 242–243, जो समान विषय को कवर करती थीं) के तहत न्यायालयों ने माना कि मात्र कब्जा पर्याप्त नहीं है — अभियोजन को यह सिद्ध करना होता है कि आरोपी को वस्तु के नकली होने का ज्ञान था और उसे असली बताकर चलाने का इरादा भी था। अदालतों ने यह भी रेखांकित किया है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य (जैसे मात्रा, छिपाकर रखना, या कब्जे के बारे में दी गई व्याख्या) प्रायः निर्णायक होते हैं, और आरोपी द्वारा विश्वसनीय स्पष्टीकरण देने पर कि वस्तु मासूमियत में मिली थी, भार फिर से अभियोजन पर लौट सकता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: सिर्फ़ नकली नोट या सिक्का अपने पास होना अपने-आप में आपको दोषी बना देता है।
तथ्य: आपको यह जानना (या मानने का कारण होना) भी ज़रूरी है कि वह नकली है और उसे असली की तरह चलाने का इरादा भी होना चाहिए — आकस्मिक या अंजाने में हुआ कब्जा अपराध नहीं है।
मिथक: एक बार आपके पास से नकली मुद्रा मिल गई, तो कोई बचाव उपलब्ध नहीं है।
तथ्य: क़ानून स्पष्ट रूप से एक बचाव की अनुमति देता है: यदि आप सिद्ध कर दें कि नकली वस्तु किसी वैध स्रोत से आई थी (जैसे आपको सामान्य लेन-देन में अंजाने में मिली), तो आपको दोषी नहीं ठहराया जाएगा।