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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 169

Candidate, electoral right defined

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

मुक्त और निष्पक्ष चुनाव इस पर निर्भर करते हैं कि लोग बिना धमकी, रिश्वत या भ्रामक तरीकों के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ सकें, हट सकें, मतदान कर सकें या मतदान से विरत रह सकें। इस अध्याय के अपराधों (जैसे रिश्वत, अनुचित प्रभाव, या प्रतिरूपण) को लागू करने से पहले ‘उम्मीदवार’ और ‘निर्वाचन अधिकार’ के स्पष्ट, निश्चित अर्थ होना आवश्यक है, ताकि न्यायालय और पुलिस हर जगह एक समान मानक लागू करें। यह परिभाषा-धारा लगभग शब्दशः उसी प्रावधान को आगे बढ़ाती है जो Indian Penal Code, 1860 (बाद में संशोधन द्वारा जोड़ा गया) में था और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के अंतर्गत भी जारी है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने प्रायः ‘उम्मीदवार’ शब्द को कड़ाई से पढ़ा है—अर्थात् इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए कोई व्यक्ति तभी ‘उम्मीदवार’ बनता है जब औपचारिक नामांकन हो चुका हो; केवल चुनाव लड़ने का इरादा जताने से नहीं। यह भेद रिश्वत और अनुचित प्रभाव संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण रहा है, जहाँ विशिष्ट अपराध-प्रावधान कभी-कभी उन व्यक्तियों तक अलग से सुरक्षा बढ़ाते हैं जो उम्मीदवार बनने का इरादा रखते हैं, क्योंकि मात्र यह परिभाषा उन्हें नहीं समेटती।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: जो भी कह दे कि वह चुनाव लड़ेगा, वह इस क़ानून के तहत पहले से ही ‘उम्मीदवार’ माना जाता है।

    तथ्य: इस धारा के अंतर्गत कोई व्यक्ति केवल औपचारिक नामांकन के बाद ही ‘उम्मीदवार’ बनता है, मात्र चुनाव लड़ने का इरादा घोषित करने से नहीं।

  • मिथक: यह धारा स्वयं कोई दंडनीय अपराध निर्मित नहीं करती।

    तथ्य: यह धारा केवल परिभाषाएँ देती है; वास्तविक अपराध (जैसे रिश्वत या अनुचित प्रभाव) इसी अध्याय की अन्य धाराओं में वर्णित हैं।