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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 112

Petty organised crime

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता का स्थान लेने वाले भारतीय न्याय संहिता (2023) से पहले, भारतीय कानून में बड़े संगठित अपराधों के लिए तो कड़े प्रावधान थे (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि के माफिया-शैली के गिरोहों को निशाना बनाने वाले विशेष कानून), पर छोटी, रोज़मर्रा की संगठित आपराधिक गतिविधियों—जैसे जेबतराशी करने वाले गिरोह, एटीएम चोरी के रैकेट, परीक्षा पत्र लीक नेटवर्क, या बार-बार और समन्वय के साथ काम करने वाले छोटे धोखाधड़ी समूह—के लिए कोई समर्पित प्रावधान नहीं था। विधि-निर्माताओं ने धारा 112 लाई ताकि ऐसे निम्न-स्तरीय परंतु लगातार होने वाले समूह अपराधों को विशेष रूप से अपराध घोषित कर कठोर दंड दिया जा सके, क्योंकि ये आम नागरिकों के दैनिक जीवन (सार्वजनिक परिवहन में चोरी, परीक्षा में धांधली, अवैध सट्टे के रैकेट) को प्रभावित करते हैं, पर पहले केवल सामान्य चोरी या धोखाधड़ी की धाराओं में हल्के परिणामों के साथ चलाए जाते थे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कानून केवल माफिया जैसे बड़े आपराधिक संगठनों पर ही लागू होता है।

    तथ्य: वास्तव में यह कानून जेबतराशी करने वाले गिरोहों या परीक्षा पत्र लीक जैसे छोटे पैमाने के ‘क्षुद्र’ संगठित अपराधों को निशाना बनाता है, न कि बड़े अपराध सिंडिकेटों को (जिन्हें भारतीय न्याय संहिता के अन्य प्रावधान कवर करते हैं)।

  • मिथक: एक अकेला व्यक्ति जो स्वयं कार्य कर रहा हो, उसे इस धारा के तहत कभी आरोपित नहीं किया जा सकता।

    तथ्य: कानून कहता है कि समूह का सदस्य ‘अकेले या मिलकर’ (singly or jointly) कृत्य कर सकता है—अर्थात समूह की गतिविधि के हिस्से के तौर पर अकेले काम करने वाला सदस्य भी इस धारा के तहत आरोपित हो सकता है।