Skip to content
सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 87

राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण

राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण— (1) राष्ट्रपति, 2लोक सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में] एक साथ समवेत संसद् के दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और संसद् को उसके आह्वान के कारण बताएगा । (2) प्रत्येक सदन की प्रक्रिया का विनियमन करने वाले नियमों द्वारा ऐसे अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों की चर्चा के लिए समय नियत करने के लिए 3*** उपबंध किया जाएगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

ब्रिटिश संसदीय परंपरा (राजा/रानी का भाषण) से ग्रहण की गई इस धारा के माध्यम से कार्यपालिका सरकार की प्राथमिकताओं और विधायी कार्यक्रम को रेखांकित कर औपचारिक रूप से संसदीय वर्ष का उद्घाटन करती है। इससे संसद को, और उसके माध्यम से जनता को, सरकार के इरादों का आधिकारिक वक्तव्य मिलता है; और यह सिर्फ प्रतीकात्मक न रह जाए—इसका आशय है कि उस पर वास्तविक बहस होनी ही चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह भाषण राष्ट्रपति स्वयं लिखती/लिखते हैं और इसकी सामग्री वही व्यक्तिगत रूप से तय करती/करते हैं।

    तथ्य: यह भाषण मंत्रिपरिषद (सरकार) द्वारा तैयार किया जाता है; राष्ट्रपति इसे अपने संवैधानिक पद के नाते पढ़ती/पढ़ते हैं, ठीक वैसे ही जैसे ब्रिटेन में सम्राट का भाषण होता है।

  • मिथक: यह संबोधन केवल एक रस्म है जिसका कोई वास्तविक प्रभाव नहीं होता।

    तथ्य: अनुच्छेद 87(2) संसद को इस संबोधन पर वास्तविक बहस (धन्यवाद प्रस्ताव: Motion of Thanks) करने का दायित्व देता है, जिससे यह सरकार की नीतियों की ठोस राजनीतिक समीक्षा का अवसर बन जाता है।