The Constitution of India
अनुच्छेद 77
भारत सरकार के कार्य का संचालन
भारत सरकार के कार्य का संचालन— (1) भारत सरकार की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राष्ट्रपति के नाम से की हुई कही जाएगी । (2) राष्ट्रपति के नाम से किए गए और निष्पादित आदेशों और अन्य लिखतों को ऐसी रीति से अधिप्रमाणित किया जाएगा जो राष्ट्रपति द्वारा बनाए जाने वाले नियमों131 में विनिर्दिष्ट की जाए और इस प्रकार अधिप्रमाणित आदेश या लिखत की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि वह राष्ट्रपति द्वारा किया गया या निष्पादित आदेश या लिखत नहीं है । (3) राष्ट्रपति, भारत सरकार का कार्य अधिक सुविधापूर्वक किए जाने के लिए और मंत्रियों में उक्त कार्य के आबंटन के लिए नियम बनाएगा । 142(4)* * * * गया था और संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 12 द्वारा (20-6-1979 से) उसका लोप किया गया ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
अनुच्छेद 77 ब्रिटेन से ग्रहण संसदीय शासन पद्धति को अभिव्यक्त करता है, जिसमें राज्य प्रमुख (भारत में राष्ट्रपति, यूके में सम्राट) औपचारिक/संवैधानिक प्रधान होते हैं, जबकि वास्तविक कार्यपालिका शक्ति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रीपरिषद द्वारा प्रयोग की जाती है। क्योंकि राष्ट्रपति प्रत्येक सरकारी आदेश पर व्यक्तिगत हस्ताक्षर नहीं कर सकते, संविधान एक विधिक कल्पना प्रदान करता है—सभी कार्यपालिक कृत्य ‘राष्ट्रपति के नाम में व्यक्त’ होते हैं—और साथ ही अधिकृत अधिकारियों को कागजी कार्यवाही निष्पादित करने देता है, जिससे प्रतीकात्मक एकता और व्यावहारिक दक्षता दोनों सुनिश्चित रहती हैं।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
Shamsher Singh v. State of Punjab (1974) जैसे मामलों में, सर्वोच्च न्यायालय ने ठहराया कि राष्ट्रपति (और राज्यों में राज्यपाल) सहायता और परामर्श पर कार्य करने वाले मात्र संवैधानिक/औपचारिक प्रधान हैं, सिवाय कुछ विशिष्ट विवेकाधीन परिस्थितियों के। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया कि उपधारा (2) के अंतर्गत प्रमाणीकरण-नियम नियमितता सुनिश्चित करने और प्रामाणिकता पर विवादों को रोकने के लिए हैं, न कि न्यायालयों को यह परखने का अधिकार देने के लिए कि क्या हर निर्णय राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत रूप से अनुमोदित किया था।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि राष्ट्रपति हर सरकारी आदेश व्यक्तिगत रूप से बनाते या उस पर हस्ताक्षर करते हैं।
तथ्य: राष्ट्रपति संवैधानिक प्रधान हैं; वास्तविक सरकारी आदेश मंत्री और अधिकारी बनाते हैं, जिन्हें केवल राष्ट्रपति के नाम में व्यक्त किया जाता है।
मिथक: यदि किसी आदेश पर राष्ट्रपति के व्यक्तिगत हस्ताक्षर नहीं हैं, तो वह अमान्य हो जाता है—यह कथन गलत है।
तथ्य: अनुच्छेद 77(2) कहता है कि जो आदेश नियमों के अनुसार विधिवत प्रमाणीकरण किया गया हो, वह वैध है, भले ही राष्ट्रपति ने उस पर व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षर न किए हों।
मिथक: सरकारी कार्य कैसे संगठित होगा, इस बारे में राष्ट्रपति व्यापक रूपरेखा और नियम निर्धारित कर सकते हैं।
तथ्य: अनुच्छेद 77(3) के अंतर्गत नियम राष्ट्रपति के नाम से बनाए जाते हैं, पर व्यवहार में वे मंत्रीपरिषद की सलाह पर ही निर्मित और लागू किए जाते हैं।