The Constitution of India
अनुच्छेद 70
अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन
अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन— संसद्, ऐसी किसी आकस्मिकता में जो इस अध्याय में उपबंधित नहीं है, राष्ट्रपति के कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगी जो वह ठीक समझे ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान के अन्य अनुच्छेद (जैसे अनुच्छेद 65) पहले से ही सामान्य रिक्तियों की भरपाई का प्रावधान करते हैं—उदाहरण के लिए, उपराष्ट्रपति द्वारा रिक्ति, अस्थायी अनुपस्थिति या बीमारी के दौरान कार्यभार संभालना। पर संविधान-निर्माताओं को पता था कि राष्ट्रपति-पद से जुड़ी हर आपात स्थिति का पहले से अनुमान संभव नहीं। अनुच्छेद 70 एक सुरक्षा-उपाय है: यह संसद को सामान्य कानून के माध्यम से किसी भी अप्रत्याशित रिक्ति या परिस्थिति को भरने की शक्ति देता है, ताकि हर नए परिदृश्य के लिए संविधान-संशोधन की ज़रूरत न पड़े।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अनुच्छेद 70 की विशिष्ट व्याख्या पर कोई बड़ा सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय नहीं है, क्योंकि इस पर शायद ही कभी वाद हुआ है; इसका प्रमुख व्यावहारिक प्रभाव न्यायिक व्याख्या की तुलना में संसद द्वारा इस शक्ति का प्रयोग कर कानून बनाने के माध्यम से देखा गया है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 70 स्वयं आपातकाल में किसे कार्यवाहक राष्ट्रपति बनना है, यह नामांकित करता है।
तथ्य: अनुच्छेद 70 किसी व्यक्ति का नाम नहीं बताता; यह केवल संसद को यह शक्ति देता है कि वह ऐसे मामलों के लिए—जो अन्यत्र पहले से कवर नहीं हैं—कानून बनाकर तय करे कि कार्यभार कौन संभालेगा।