The Constitution of India
अनुच्छेद 68
उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि
उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि— (1) उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति से हुई रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूर्ण कर लिया जाएगा । (2) उपराष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से हुई उसके पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, रिक्ति होने के पश्चात् यथाशीघ्र किया जाएगा और रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति, अनुच्छेद 67 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की पूरी अवधि तक पद धारण करने का हकदार होगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान यह सुनिश्चित करना चाहता था कि उपराष्ट्रपति का पद — जो राज्यसभा की अध्यक्षता और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रपति के स्थानापन्न बनने से जुड़ा है — लंबे समय तक खाली न रहे। अनुच्छेद 68, राष्ट्रपति के पद के लिए निरंतरता से जुड़े प्रावधान (अनुच्छेद 62) का प्रतिबिम्ब है, और यह तय करता है कि अपेक्षित (कार्यकाल की समाप्ति) हो या अप्रत्याशित (मृत्यु, इस्तीफा, हटाना) खालीपन—हस्तांतरण सुचारु रहे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि किसी आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए उपराष्ट्रपति चुना जाए, तो वह केवल पूर्ववर्ती उपराष्ट्रपति के कार्यकाल का शेष समय ही पूरा करेगा।
तथ्य: अनुच्छेद 68(2) स्पष्ट करता है कि ऐसे चुने गए व्यक्ति को शपथ लेने की तारीख़ से पूरा नया पाँच वर्षीय कार्यकाल मिलता है, केवल बचा हुआ समय नहीं।