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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 65

राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके कृत्यों का निर्वहन

राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना या उसके कृत्यों का निर्वहन— (1) राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से उसके पद में हुई रिक्ति की दशा में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जिस तारीख को ऐसी रिक्ति को भरने के लिए इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार निर्वाचित नया राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करता है । (2) जब राष्ट्रपति अनुपस्थिति, बीमारी या अन्य किसी कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है तब उपराष्ट्रपति उस तारीख तक उसके कृत्यों का निर्वहन करेगा जिस तारीख को राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को फिर से संभालता है । (3) उपराष्ट्रपति को उस अवधि के दौरान और उस अवधि के संबंध में, जब वह राष्ट्रपति के रूप में इस प्रकार कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, राष्ट्रपति की सभी शक्तियां और उन्मुक्तियां होंगी तथा वह ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का जो संसद्, विधि द्वारा, अवधारित करे, और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, हकदार होगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारत के संविधान-निर्माताओं ने यह सुनिश्चित करना चाहा कि देश के सर्वोच्च पद में कभी शून्य न आए। राष्ट्रपति औपचारिक व संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, जिनके हस्ताक्षर और अनुमोदन अनेक आधिकारिक कार्यों के लिए अपेक्षित होते हैं; अतः कोई भी रिक्ति शासन-प्रक्रिया बाधित कर सकती है। अनुच्छेद 65 संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर निरंतरता सुनिश्चित करता है, और उपराष्ट्रपति—जो पहले से संसद द्वारा निर्वाचित होते हैं और संवैधानिक प्रक्रियाओं से परिचित रहते हैं—को स्वतः कार्यभार संभालने वाला बनाता है, चाहे रिक्ति स्थायी हो (मृत्यु, त्यागपत्र, पदच्युत) या अस्थायी (बीमारी, विदेश यात्रा या अन्य अक्षमता)।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है कि अनुच्छेद 65 के तहत उपराष्ट्रपति स्थायी रूप से राष्ट्रपति बन जाते हैं।

    तथ्य: उपराष्ट्रपति केवल अस्थायी रूप से कार्य करते हैं—या तो तब तक जब तक राष्ट्रपति स्वस्थ होकर/वापस आकर कार्यभार नहीं संभाल लेते, या तब तक जब तक संवैधानिक समय-सीमा के भीतर नया राष्ट्रपति विधिवत निर्वाचित होकर पदभार ग्रहण नहीं कर लेता।

  • मिथक: यह कथन गलत है कि कार्यवाहक रहते हुए उपराष्ट्रपति की शक्तियाँ कम हो जाती हैं।

    तथ्य: अनुच्छेद 65(3) साफ़ करता है कि इस अवधि में उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ, उन्मुक्तियाँ (immunities) और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।