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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 48

कृषि और पशुपालन का संगठन

कृषि और पशुपालन का संगठन— राज्य, कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा और विशिष्टतया गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परिरक्षण और सुधार के लिए और उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह अनुच्छेद राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) का भाग है, जिन्हें संविधान-निर्माताओं ने सरकारी नीतियों का मार्गदर्शन करने हेतु जोड़ा, भले ही ये सिद्धांत न्यायालय में प्रत्यक्षतः प्रवर्तनीय नहीं हैं। यह भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को दर्शाता है, जहाँ पशुधन खेती (हल/जोत शक्ति) और दुग्ध उत्पादन के लिए आवश्यक था। यह हिंदू परंपरा में गाय के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी प्रतिबिंबित करता है, जिससे आर्थिक आधुनिकीकरण के लक्ष्यों का सांस्कृतिक मूल्यों से संगम होता है। निर्माताओं की इच्छा थी कि भारत वैज्ञानिक कृषि-प्रथाओं की ओर बढ़े, साथ ही उस पशु की रक्षा भी हो जिसे ग्रामीण आजीविका के लिए अत्यावश्यक माना गया और जिसे अनेक लोग श्रद्धेय मानते हैं।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

उच्चतम न्यायालय ने कई मामलों में राज्य के गौवध-प्रतिबंधित कानूनों को बरकरार रखते हुए अनुच्छेद 48 का हवाला दिया है; जैसे Mohd. Hanif Quareshi v. State of Bihar (1958) में न्यायालय ने गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध को तर्कसंगत माना, पर अन्य पशुधन पर प्रतिबंध के लिए आर्थिक औचित्य आवश्यक बताया। बाद के मामलों में, जिनमें State of Gujarat v. Mirzapur Moti Kureshi Kassab Jamat (2005) शामिल है, राज्यों को व्यापक प्रतिबंधों के औचित्य के लिए अधिक गुंजाइश दी गई, और न्यायालयों ने अनुच्छेद 48 के निर्देश को नागरिकों के व्यापार और धर्म की मूल अधिकारों (अनुच्छेद 19 और 25) के साथ संतुलित किया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 48 भारत में हर जगह गौवध को स्वतः अवैध नहीं बनाता।

    तथ्य: स्वयं अनुच्छेद 48 प्रत्यक्षतः प्रवर्तनीय कानून नहीं है; यह एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। वास्तविक गौवध-प्रतिबंध अलग-अलग राज्य कानूनों से आते हैं, और उनकी वैधता का परीक्षण न्यायालय मूल अधिकारों को ध्यान में रखकर करते हैं।

  • मिथक: अनुच्छेद 48 केवल धार्मिक कारणों से गायों की रक्षा करता है — यह कथन गलत है।

    तथ्य: यद्यपि धार्मिक भावना एक ऐसा कारक है जिसे न्यायालयों ने स्वीकार किया है, अनुच्छेद 48 का पाठ आर्थिक और वैज्ञानिक कारणों पर केंद्रित है—नस्ल-संरक्षण तथा दूध और खेत के काम में उपयोगी पशुओं की रक्षा।