The Constitution of India
अनुच्छेद 371I
गोवा राज्य के संबंध में विशेष उपबंध
गोवा राज्य के संबंध में विशेष उपबंध— इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, गोवा राज्य की विधान सभा कम से कम तीस सदस्यों से मिलकर बनेगी ।]
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
गोवा जनसंख्या के आधार पर भारत के सबसे छोटे राज्यों में से एक है। संविधान का अनुच्छेद 170 सामान्यतः हर राज्य की विधानसभा में 60 से 500 सदस्यों की सीमा निर्धारित करता है। इस नियम को छोटे राज्य गोवा पर यथावत लागू करने से या तो जनसंख्या के अनुपात से अधिक प्रतिनिधित्व होता या निर्वाचन क्षेत्रों का आकार-विन्यास अप्राकृतिक बनता। जब 1987 में गोवा पूर्ण राज्य बना (इससे पहले यह दमन और दीव के साथ एक केंद्रशासित प्रदेश था), तब संसद ने यह विशेष प्रावधान जोड़ा, तथा संबंधित अनुच्छेद 371-I (और दमन व दीव की व्यवस्थाओं के सहायक प्रावधान) के साथ, ताकि गोवा के आकार के अनुरूप न्यूनतम सदस्यों की छोटी, व्यावहारिक सीमा तय हो सके, और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का सम्मान भी बना रहे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: गोवा की विधानसभा में ठीक 30 सदस्य होना अनिवार्य है।
तथ्य: यह अनुच्छेद 30 को न्यूनतम सीमा ठहराता है, कोई स्थिर संख्या नहीं — इसलिए गोवा की विधानसभा में 30 से अधिक सदस्य हो सकते हैं (और वर्तमान में हैं)।
मिथक: यह अनुच्छेद गोवा की लोकसभा (Parliament) सीटों पर भी लागू होता है।
तथ्य: अनुच्छेद 371-I केवल राज्य की विधानसभा से संबंधित है, न कि राष्ट्रीय संसद में गोवा के प्रतिनिधित्व से।