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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 371G

मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध

मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष उपबंध— इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-- (क) निम्नलिखित के संबंध में संसद् का कोई अधिनियम मिजोरम राज्य को तब तक लागू नहीं होगा जब तक मिजोरम राज्य की विधान सभा संकल्प द्वारा ऐसा विनिश्चय नहीं करती है, अर्थात्:— (i) मिजो लोगों की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएं; (ii) मिजो रूढ़िजन्य विधि और प्रक्रिया; (iii) सिविल और दांडिक न्याय प्रशासन, जहां विनिश्चय मिजो रूढ़िजन्य विधि के अनुसार होने हैं; (iv) भूमि का स्वामित्व और अंतरण: परंतु इस खंड की कोई बात, संविधान (तिरपनवां संशोधन) अधिनियम, 1986 के प्रारंभ से ठीक पहले मिजोरम संघ राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त किसी केंद्रीय अधिनियम को लागू नहीं होगी; (ख) मिजोरम राज्य की विधान सभा कम से कम चालीस सदस्यों से मिलकर बनेगी ।]

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

मिज़ोरम का राज्य बनने का मार्ग 1986 के मिज़ो समझौते से निकला, जिसने मिज़ो नेशनल फ़्रंट के नेतृत्व में चले वर्षों के उग्रवाद का अंत किया। इसी शांति समझौते के हिस्से के रूप में संविधान (Fifty-third Amendment) Act, 1986 द्वारा अनुच्छेद 371G जोड़ा गया, ताकि मिज़ो जनता को आश्वस्त किया जा सके कि उनकी विशिष्ट परंपराएँ, पारंपरिक न्याय प्रणाली और भूमि पर उनका नियंत्रण एकतरफ़ा केंद्रीय कानून निर्माण से सुरक्षित रहेंगे—जैसा कि पहले नागालैंड को अनुच्छेद 371A के तहत संरक्षण दिया गया था। यह भारत की व्यापक नीति को दर्शाता है, जिसमें जनजातीय और क्षेत्रीय पहचानों को विषम संघवाद (asymmetric federalism) के माध्यम से समायोजित किया जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 371G का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी केंद्रीय क़ानून कभी मिज़ोरम पर लागू ही नहीं हो सकता।

    तथ्य: यह प्रतिबंध केवल चार विशिष्ट विषयों तक सीमित है (धार्मिक/सामाजिक व्यवहार, प्रथागत क़ानून, प्रथागत न्याय, और भूमि); अन्य केंद्रीय क़ानून सामान्य रूप से लागू होते हैं, और इन चार विषयों पर भी क़ानून तब लागू हो सकते हैं जब मिज़ोरम की विधानसभा सहमति दे।

  • मिथक: यह प्रावधान 1986 से पहले के सभी केंद्रीय क़ानूनों को भी रोक देता है—ऐसा नहीं है।

    तथ्य: उपबंध स्पष्ट रूप से उन केंद्रीय क़ानूनों को सुरक्षित रखता है जो 1986 संशोधन से पहले मिज़ोरम के केंद्रशासित प्रदेश में पहले से लागू थे—वे बिना विधानसभा की स्वीकृति के जारी रहते हैं।