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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 371

महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध

2*** महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के संबंध में विशेष उपबंध-3(1)***] (2) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति, 4महाराष्ट्र या गुजरात राज्य] के संबंध में किए गए आदेश द्वारा— (क) यथास्थिति, विदर्भ, मराठवाड़ा 5और शेष महाराष्ट्र या] सौराष्ट्र, कच्छ और शेष गुजरात के लिए पृथक् विकास बोर्डों की स्थापना के लिए, इस उपबंध सहित कि इन बोर्डों में से प्रत्येक के कार्यकरण पर एक प्रतिवेदन राज्य विधान सभा के समक्ष प्रतिवर्ष रखा जाएगा; (ख) समस्त राज्य की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए, उक्त क्षेत्रों के विकास व्यय के लिए निधियों के साम्यापूर्ण आबंटन के लिए; और (ग) समस्त राज्य की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए, उक्त सभी क्षेत्रों के संबंध में, तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सुविधाओं की और राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन सेवाओं में नियोजन के लिए पर्याप्त अवसरों की व्यवस्था करने वाली साम्यापूर्ण व्यवस्था करने के लिए, राज्यपाल के किसी विशेष उत्तरदायित्व के लिए उपबंध कर सकेगा ।]

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

महाराष्ट्र और गुजरात, 1960 में पूर्ववर्ती बॉम्बे राज्य से भाषाई और क्षेत्रीय आंदोलनों के बाद निर्मित किए गए। प्रत्येक नए राज्य के भीतर कुछ क्षेत्र (जैसे महाराष्ट्र में विदर्भ और मराठवाड़ा, या गुजरात में सौराष्ट्र और कच्छ) ऐतिहासिक रूप से विकास में पीछे रहे थे। अनुच्छेद 371(2) जोड़ा गया ताकि इन क्षेत्रों को भरोसा दिलाया जा सके कि एक विशेष संवैधानिक तंत्र—विकास मंडल और राज्यपाल की निगरानी—वित्त, शिक्षा और नौकरियों में निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करने में मदद करेगा, ताकि राज्यों के पुनर्गठन के बाद क्षेत्रीय उपेक्षा की आशंकाएँ कम हों।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने सामान्यतः इस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल की ‘विशेष जिम्मेदारी’ को विवेकाधीन और प्रायः अप्रjusticiable (न्यायिक रूप से न निपटने योग्य) राजनीतिक‑प्रशासनिक कार्य के रूप में माना है, अर्थात् न्यायालय प्रायः यह निर्देश देने से परहेज़ करते रहे हैं कि मंडल कैसे गठित हों या निधियों का आवंटन कैसे हो; यद्यपि कभी‑कभी उन्होंने यह परखा है कि राष्ट्रपति के आदेशों और मंडलों की रिपोर्टों का वैधानिक और संवैधानिक मानकों के अनुसार पालन हुआ या नहीं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 371(2) इन क्षेत्रों को उनके अपने अलग सरकारें नहीं देता।

    तथ्य: यह केवल विकास मंडलों का गठन और संसाधनों के निष्पक्ष बँटवारे हेतु राज्यपाल की निगरानी की व्यवस्था करता है; यह अलग राज्य सरकारें या विधानमंडल स्थापित नहीं करता।

  • मिथक: यह अनुच्छेद प्रत्येक क्षेत्र को, राज्य की आवश्यकताओं की परवाह किए बिना, समान निधि की गारंटी देता है—ऐसा नहीं है।

    तथ्य: पाठ में स्पष्ट है कि आवंटन ‘न्यायसंगत’ होना चाहिए, पर ‘समूचे राज्य की आवश्यकताओं के अधीन’ भी—अर्थात यह संतुलन का प्रश्न है, न कि सख्त समान हिस्सेदारी का।