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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 346

एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा

एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा— संघ में शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने के लिए तत्समय प्राधिकृत भाषा, एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच तथा किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा होगी: परन्तु यदि दो या अधिक राज्य यह करार करते हैं कि उन राज्यों के बीच पत्रादि की राजभाषा हिन्दी भाषा होगी तो ऐसे पत्रादि के लिए उस भाषा का प्रयोग किया जा सकेगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह अनुच्छेद संविधान की भाषा-नीति पर किए गए सावधानीपूर्ण समझौते का हिस्सा था। जहाँ अनुच्छेद 343 ने संघ की आधिकारिक भाषा हिन्दी को माना (और अंग्रेज़ी को भी प्रारम्भ में 15 वर्षों के लिए और तत्पश्चात विधि द्वारा अनिश्चितकाल तक साथ जारी रखा), वहीं निर्माताओं को यह स्पष्ट नियम चाहिए था कि राज्यों और संघ के बीच कागज़ी संवाद किस भाषा में हो। किसी एक प्रादेशिक भाषा को बढ़त न मिले और भ्रम न हो, इसलिए राज्यों के परस्पर तथा राज्य-केन्द्र संवाद को उस समय संघ प्रयोजनों के लिए विधिपूर्वक अधिकृत भाषा से जोड़ा गया — जिसका व्यावहारिक अर्थ रहा कि हिन्दी के साथ अंग्रेज़ी जारी रही। साथ ही उपबंध ने हिन्दीभाषी राज्यों को यह लचीलापन दिया कि वे परस्पर इच्छा होने पर हिन्दी में पत्राचार करें, क्षेत्रीय पसंद का सम्मान करते हुए बिना दूसरों पर थोपे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 346 राज्यों के बीच सभी संचार के लिए हिन्दी को अनिवार्य बनाता है।

    तथ्य: हिन्दी का उपयोग राज्यों के बीच तभी होता है जब वे राज्य विशेष रूप से इस पर सहमत हों; अन्यथा डिफ़ॉल्ट वही भाषा रहती है जो संघ के आधिकारिक प्रयोजनों के लिए वर्तमान में अधिकृत है, जिसमें अंग्रेज़ी शामिल रही है।

  • मिथक: यह अनुच्छेद भारत की राष्ट्रीय भाषा का निर्णय करता है।

    तथ्य: संघ की आधिकारिक भाषा अनुच्छेद 343 से निर्धारित होती है, न कि इस अनुच्छेद से। अनुच्छेद 346 केवल राज्यों के आपसी तथा राज्य और संघ के बीच होने वाले आधिकारिक संचार की भाषा से सम्बद्ध है।