The Constitution of India
अनुच्छेद 258A
संघ को कृत्य सौंपने की राज्यों की शक्ति
संघ को कृत्य सौंपने की राज्यों की शक्ति — इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, किसी राज्य का राज्यपाल, भारत सरकार की सहमति से उस सरकार को या उसके अधिकारियों को ऐसे किसी विषय से संबंधित कृत्य, जिन पर उस राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, सशर्त या बिना शर्त सौंप सकेगा ।]
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह अनुच्छेद संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित परिवर्तनों के साथ जोड़ा गया था। यह अनुच्छेद 258 का पूरक है, जो संघ को अपने कार्य राज्यों को सौंपने की अनुमति देता है। अनुच्छेद 258A विपरीत मार्ग बनाता है—राज्यों को कुछ प्रशासनिक कार्य संघ को सौंपने की अनुमति देते हुए—जब किसी कार्य में विषय राज्य के कार्यपालक क्षेत्राधिकार में हो, पर केंद्र के पास उस विशेष काम के लिए बेहतर संसाधन, विशेषज्ञता या पहुँच हो।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कथन गलत है: इस अनुच्छेद के तहत केंद्र सरकार किसी भी समय मनमाने ढंग से राज्य का कोई कार्य अपने हाथ में नहीं ले सकती।
तथ्य: राज्यपाल को वह कार्य सौंपने का निर्णय लेना होता है, और केंद्र सरकार की सहमति आवश्यक है; केंद्र यह व्यवस्था किसी राज्य पर एकतरफा थोप नहीं सकता।
मिथक: यह अनुच्छेद अनुच्छेद 258 के समान ढंग से काम नहीं करता; यह उसका प्रतिलोम है।
तथ्य: अनुच्छेद 258 संघ को अपने कार्य राज्यों को सौंपने देता है, जबकि अनुच्छेद 258A उलटी दिशा में काम करता है—राज्यों को अपने कुछ कार्य संघ को सौंपने की अनुमति देता है।