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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 245

संसद् द्वारा और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों का विस्तार

संसद् द्वारा और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों का विस्तार — (1) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संसद् भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगी और किसी राज्य का विधान- मंडल संपूर्ण राज्य या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकेगा । (2) संसद् द्वारा बनाई गई कोई विधि इस आधार पर अविधिमान्य नहीं समझी जाएगी कि उसका राज्यक्षेत्रातीत प्रवर्तन होगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारत एक संघीय संघ है जहाँ विधि-निर्माण शक्ति केंद्र और राज्यों के बीच बाँटी गई है। अनुच्छेद 245 इस शक्ति की मूल भौगोलिक सीमा तय करता है: संसद पूरे देश के लिए, और राज्य अपनी-अपनी सीमा के लिए। उपबंध (2) इसलिए जोड़ा गया कि वैश्वीकरण में विदेश में होने वाली गतिविधियाँ (जैसे किसी कंपनी की विदेशी शाखा, अपतटीय वित्तीय सौदा, या सीमा-पार कड़ियों वाला अपराध) भारत को गम्भीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। निर्माताओं ने स्पष्ट करना चाहा कि केवल इसलिए कि कारण या प्रभाव भारतीय भू-भाग के बाहर है, संसद निष्क्रिय नहीं है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

GVK Industries Ltd. बनाम Income Tax Officer (2011) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि यद्यपि संसद अनुच्छेद 245(2) के तहत अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रभाव वाले क़ानून वैध रूप से बना सकती है, ऐसे क़ानून का भारत से वास्तविक और उपयुक्त संबंध (नेक्सस) होना चाहिए — वह पूरी तरह भारत से असंबद्ध शुद्ध अतिरिक्त-क्षेत्रीय नहीं हो सकता। इससे पहले State of Bombay बनाम RMD Chamarbaugwala तथा Bengal Immunity प्रकरण जैसे मामलों में राज्य क़ानूनों की राज्य-सीमा के पार पहुँच पर विचार हुआ, और सामान्यतः माना गया कि राज्यों की शक्तियाँ संसद की तुलना में अधिक कड़ाई से क्षेत्र-बंध हैं, तथा राज्य क़ानून के किसी भी अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रभाव का उस राज्य से पर्याप्त क्षेत्रीय नेक्सस होना चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: उपबंध (2) का अर्थ यह नहीं है कि संसद दुनिया में कहीं भी हो रही किसी भी बात पर बिना किसी सीमा के क़ानून बना सकती है।

    तथ्य: न्यायालयों ने, विशेषकर GVK Industries बनाम ITO (2011) में, स्पष्ट किया है कि ऐसे क़ानूनों का भारत के हितों से वास्तविक संबंध या नेक्सस होना चाहिए — वे पूरी तरह भारत से कٹے हुए नहीं हो सकते।

  • मिथक: राज्य विधानमंडलों को संसद के बराबर यह शक्ति नहीं है कि वे अपने राज्य के बाहर प्रभाव वाले क़ानून मनमाने तौर पर बना सकें।

    तथ्य: अनुच्छेद 245(1) राज्यों को उनके अपने क्षेत्र तक सीमित करता है; केवल संसद को उपबंध (2) के तहत अतिरिक्त-क्षेत्रीय क़ानूनों का स्पष्ट संवैधानिक संरक्षण है, यद्यपि न्यायालयों ने पर्याप्त क्षेत्रीय नेक्सस होने पर राज्यों के कुछ क़ानूनों के सहप्रभावस्वरूप अतिरिक्त-क्षेत्रीय असर को स्वीकार किया है।