The Constitution of India
अनुच्छेद 243ZT
विद्यमान विधियों का जारी रहना
विद्यमान विधियों का जारी रहना — इस भाग में किसी बात के होते हुए भी, संविधान (सतानवेवां संशोधन) अधिनियम, 2011 के प्रारंभ से ठीक पूर्व किसी राज्य में प्रवृत्त सहकारी सोसाइटियों से संबंधित किसी विधि का कोई उपबंध, जो इस भाग के उपबंधों से असंगत है, उसे सक्षम विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा संशोधित या निरसित किए जाने तक या ऐसे प्रारंभ से एक वर्ष के समाप्त होने तक, इनमें से जो भी कम हो, प्रवृत्त बना रहेगा ।] अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान (सत्तानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2011 ने पूरे देश में सहकारी समितियों के संचालन को मानकीकृत करने के लिए एक नया भाग (भाग IXB) जोड़ा — जिसमें चुनाव, प्रबंध मंडल का कार्यकाल, लेखा-परीक्षा आदि शामिल थे। चूँकि राज्यों के पास पहले से अपने-अपने सहकारी कानून थे, जिनमें से अनेक नए एकरूप नियमों से टकराते थे, इसलिए अनुच्छेद 243ZT को एक संक्रमणीय प्रावधान के रूप में जोड़ा गया। इसने राज्यों को एक वर्ष की छूट दी ताकि वे अपने मौजूदा कानूनों को नए संवैधानिक ढांचे के अनुरूप ला सकें और हजारों चालू सहकारी संस्थाओं के लिए अचानक कानूनी अव्यवस्था न हो।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
Union of India v. Rajendra N. Shah (2021) में, सर्वोच्च न्यायालय ने भाग IXB का समग्र परीक्षण किया। न्यायालय ने माना कि राज्य-विशिष्ट सहकारी समितियों पर लागू व्यवस्थाएँ असंवैधानिक हैं क्योंकि संशोधन को अनुच्छेद 368(2) के अनुसार कम-से-कम आधे राज्य विधानसभाओं से अनुमोदन नहीं मिला था, जबकि सहकारी समितियाँ राज्य विषय हैं। न्यायालय ने भाग IXB को केवल बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर लागू सीमा तक संरक्षित रखा। इस निर्णय ने अनुच्छेद 243ZT के व्यावहारिक दायरे को काफी संकुचित कर दिया, क्योंकि भाग IXB का बड़ा हिस्सा, जिसमें राज्यों को स्थानांतरित होना था, अब शुद्ध रूप से राज्य-आधारित सहकारिताओं पर लागू नहीं रहता।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 243ZT का अर्थ यह नहीं है कि पुराने सहकारी क़ानून नए संवैधानिक नियमों से स्थायी रूप से सुरक्षित हो गए हैं।
तथ्य: यह सुरक्षा अस्थायी है — यह तभी तक रहती है जब तक राज्य अपना क़ानून बदल दे या एक वर्ष बीत जाए, जो भी पहले हो।
मिथक: यह अनुच्छेद आज भी सभी राज्य-आधारित सहकारी समितियों पर पूर्ण रूप से लागू है।
तथ्य: सुप्रीम कोर्ट के 2021 के Union of India v. Rajendra N. Shah निर्णय के बाद, भाग IXB (और परिणामस्वरूप यह संक्रमणीय धारा) मुख्यतः बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर लागू रहती है, न कि पूर्णतः राज्य-आधारित सहकारिताओं पर।