The Constitution of India
अनुच्छेद 243R
नगरपालिकाओं की संरचना
नगरपालिकाओं की संरचना — (1) खंड (2) में जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, किसी नगरपालिका के सभी स्थान, नगरपालिका क्षेत्र में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने हुए व्यक्तियों द्वारा भरे जाएंगे और इस प्रयोजन के लिए, प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र को प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा जो वार्ड के नाम से ज्ञात होंगे । (2) किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, — (क) नगरपालिका में, — (i) नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों का; (ii) लोक सभा के ऐसे सदस्यों का और राज्य की विधान सभा के ऐसे सदस्यों का, जो उन निर्वाचन-क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनमें कोई नगरपालिका क्षेत्र पूर्णतः या भागतः समाविष्ट हैं; (iii) राज्य सभा के ऐसे सदस्यों का और राज्य की विधान परिषद् के ऐसे सदस्यों का, जो नगरपालिका क्षेत्र के भीतर निर्वाचकों के रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं; (iv) अनुच्छेद 243ध के खंड (5) के अधीन गठित समितियों के अध्यक्षों का, प्रतिनिधित्व करने के लिए उपबंध कर सकेगा: परंतु पैरा (i) में निर्दिष्ट व्यक्तियों को नगरपालिका के अधिवेशनों में मत देने का अधिकार नहीं होगा; (ख) किसी नगरपालिका के अध्यक्ष के निर्वाचन की रीति का उपबंध कर सकेगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
74वाँ संविधान संशोधन (1992) से पहले, शहरी स्थानीय निकाय राज्यों में बहुत भिन्न थे—कुछ में अधिकतर नामांकन होता था, कुछ में चुनाव, और प्रतिनिधित्व के नियम असंगत थे। अनुच्छेद 243R का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नगरपालिकाएँ मुख्यतः लोकतांत्रिक निकाय हों जिन्हें नागरिक सीधे चुनें, जैसे अनुच्छेद 243C पंचायतों के लिए करता है। साथ ही, यह सीमित रूप से कुछ अतिरिक्त सदस्यों—जैसे स्थानीय सांसद/विधायक या विषय-विशेषज्ञ—को जोड़ने की अनुमति देता है, ताकि व्यापक समन्वय और विशेषज्ञता का लाभ मिले, पर उनकी प्रभाव-सीमा बाँध देता है क्योंकि गैर-निर्वाचित ‘विशेष ज्ञान’ वाले सदस्यों को मतदान अधिकार नहीं दिए जाते।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने सामान्यतः अनुच्छेद 243R को अनुच्छेद 243S के साथ पढ़ते हुए प्रत्यक्ष निर्वाचन की प्रधानता को नगरपालिका की रचना का संवैधानिक मानक माना है। संबंधित प्रावधानों (जैसे परिसीमन, आरक्षण, और वार्ड समितियों की संरचना) पर निर्णयों में यह रेखांकित किया गया है कि उपधारा (2) के अंतर्गत बना कोई भी राज्य कानून उपधारा (1) द्वारा सुनिश्चित नगरपालिका के मूलतः निर्वाचित स्वरूप को कमज़ोर नहीं कर सकता। भाग IX के मुक़ाबले यहाँ कोई एक अत्यंत प्रसिद्ध वाद नहीं है, पर नगर विधियों की न्यायिक समीक्षा में लगातार यह माना गया है कि मनोनीत या पदेन सदस्यों को संविधान द्वारा अनुमत सीमा से परे मतदान अधिकार नहीं दिए जा सकते, जिससे उपधारा (2)(a) के उपबंध की पुष्टि होती है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: नगरपालिका के सभी सदस्य, जिनमें सांसद, विधायक और विशेषज्ञ शामिल हैं, परिषद बैठकों में वोट कर सकते हैं।
तथ्य: केवल सीधे निर्वाचित सदस्य और कुछ निर्दिष्ट प्रतिनिधि (जैसे उपधारा 2(a)(ii) और (iii) के अंतर्गत सांसद/विधायक) ही मतदान कर सकते हैं; जबकि उपधारा 2(a)(i) के अंतर्गत विशेष ज्ञान या अनुभव के आधार पर शामिल किए गए व्यक्तियों को मतदान से वंचित किया गया है।
मिथक: राज्य चुनाव कराए बिना अधिकांश नगर सदस्यों को स्वतंत्र रूप से नामित कर सकते हैं।
तथ्य: उपधारा (1) सभी सीटों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव को मूल नियम बनाती है; नामित या अतिरिक्त प्रतिनिधित्व केवल सीमित अपवाद है, जो उपधारा (2) के अंतर्गत ही अनुमत है।