The Constitution of India
अनुच्छेद 243J
पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा
पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा— किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, पंचायतों द्वारा लेखे रखे जाने और ऐसे लेखाओं की संपरीक्षा करने के बारे में उपबंध कर सकेगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
73वां संवैधानिक संशोधन (1993) के बाद पंचायतों को स्थानीय शासन चलाने के वास्तविक अधिकार और धन मिला, तो वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत हुई। अनुच्छेद 243J लेखा-निर्वहन और लेखापरीक्षण का विस्तृत विन्यास अलग‑अलग राज्यों पर छोड़ता है, क्योंकि भारत भर में स्थानीय प्रशासनिक व्यवहार, संसाधन और क्षमता बहुत भिन्न हैं। यह संविधान के भाग IX की व्यापक रूपरेखा को दर्शाता है—जहाँ पंचायतों के लिए साझा ढाँचा तय है, पर क्रियान्वयन के सूक्ष्म नियम राज्यों के अपने कानूनों से भरे जाते हैं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: संविधान स्वयं पंचायतों के खातों के रख-रखाव और लेखापरीक्षण के लिए विस्तृत नियम निर्धारित करता है।
तथ्य: संविधान केवल राज्य विधायिकाओं को ऐसे कानून बनाने की शक्ति देता है; वास्तविक विस्तृत नियम सीधे संविधान से नहीं, बल्कि राज्य स्तर के विधानों से आते हैं।
मिथक: पंचायत का लेखापरीक्षण वैकल्पिक है या पंचायतें खाते न रखने का चुनाव कर सकती हैं।
तथ्य: जब कोई राज्य अनुच्छेद 243J के अंतर्गत कानून बना देता है, तो उस राज्य की पंचायतों के लिए खाते रखना और लेखापरीक्षण कराना एक कानूनी अनिवार्यता बन जाता है।