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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 243A

ग्राम सभा

ग्राम सभा— ग्राम सभा, ग्राम स्तर पर ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन कर सकेगी, जो किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा, विधि द्वारा, उपबंधित किए जाएं ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह अनुच्छेद 1992 के 73वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, जिसने ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज) के लिए देशव्यापी ढाँचा स्थापित किया। उद्देश्य यह था कि ग्राम सभा—जो किसी गाँव में मतदाता के रूप में पंजीकृत सभी वयस्क निवासियों की बैठक है—को जमीनी लोकतंत्र की आधारभूत इकाई माना जाए, ताकि लोकतंत्र गाँववासियों के और निकट आए। लेकिन पूरे देश में ग्राम सभा की एक जैसी, एकरूप भूमिका तय करने के बजाय, संविधान ने वास्तविक अधिकारों और कार्यों का निर्धारण प्रत्येक राज्य की विधायिका पर छोड़ दिया, क्योंकि स्थानीय परिस्थितियाँ, परंपराएँ और प्रशासनिक क्षमताएँ बहुत भिन्न हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: भारत की हर ग्राम सभा के अधिकार एक जैसे होते हैं।

    तथ्य: संविधान स्वयं विशिष्ट अधिकार तय नहीं करता; वह यह काम प्रत्येक राज्य की विधायिका पर छोड़ता है, इसलिए ग्राम सभा की वास्तविक भूमिका राज्य दर राज्य भिन्न हो सकती है।

  • मिथक: ग्राम सभा और ग्राम पंचायत एक ही चीज़ हैं।

    तथ्य: ग्राम सभा किसी गाँव के सभी पंजीकृत मतदाताओं की सभा है, जबकि ग्राम पंचायत वह निर्वाचित निकाय है जो गाँव का शासन चलाती है—ये दो अलग संस्थाएँ हैं।