The Constitution of India
अनुच्छेद 234
न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती
न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती— जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की किसी राज्य की न्यायिक सेवा में नियुक्ति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा, राज्य लोक सेवा आयोग से और ऐसे राज्य के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात्, और राज्यपाल द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार की जाएगी ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान के निर्माताओं ने चाहा कि अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्तियाँ—प्रवेश-स्तर के वे न्यायाधीश जो ट्रायल कोर्ट प्रणाली की रीढ़ हैं—शुद्ध कार्यपालिका-विवेक के बजाय सिविल सेवा भर्ती जैसी निष्पक्ष, प्रतियोगी प्रक्रिया से हों। साथ ही, वे चाहते थे कि न्यायपालिका, उच्च न्यायालय के माध्यम से, सार्थक भूमिका निभाए, क्योंकि ये अधिकारी न्यायिक पर्यवेक्षण में काम करते हैं और उनकी गुणवत्ता समूची न्याय व्यवस्था को प्रभावित करती है। इसी कारण लोक सेवा आयोग (मेधा-आधारित भर्ती हेतु) और उच्च न्यायालय (न्यायिक क्षमता हेतु) दोनों से परामर्श की बाध्यता कार्यपालिका की सत्ता को न्यायिक तथा प्रशासनिक विशेषज्ञता के साथ संतुलित करती है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 234 को अनुच्छेद 233 और 235 के साथ पढ़ते हुए अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों की भर्ती, प्रशिक्षण और नियंत्रण के मामलों में उच्च न्यायालय की प्रमुख भूमिका की रक्षा की है। State of Bihar v. Bal Mukund Sah (2000) जैसे मामलों में न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 234 के अंतर्गत उच्च न्यायालय से किया जाने वाला ‘परामर्श’ मात्र औपचारिकता नहीं है—नियुक्ति नियमों का निर्माण और चयन की प्रक्रिया (अक्सर न्यायिक सेवा परीक्षा के माध्यम से) में उच्च न्यायालय की भूमिका केंद्रीय है, और इस भूमिका को दरकिनार या कमजोर करने के विधायी या कार्यकारी प्रयास निरस्त किए गए हैं। न्यायालयों ने लगातार रेखांकित किया है कि न्यायिक स्वतंत्रता के लिए उच्च न्यायालय की प्रभावी, न कि दिखावटी, भागीदारी आवश्यक है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि राज्यपाल स्वयं अपनी पसंद से यह तय करते हैं कि कनिष्ठ न्यायाधीश कौन बनेगा।
तथ्य: राज्यपाल की भूमिका औपचारिक है—चयन-प्रक्रिया वस्तुतः राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के माध्यम से बने नियमों और अनुशंसाओं द्वारा संचालित होती है, और राज्यपाल उन्हीं के अनुरूप कार्य करते हैं।
मिथक: अनुच्छेद 234 किसी राज्य के सभी न्यायाधीशों पर लागू नहीं होता; इसमें जिला न्यायाधीश शामिल नहीं हैं।
तथ्य: अनुच्छेद 234 विशेष रूप से जिला न्यायाधीशों को अपवर्जित करता है—उनकी नियुक्ति पृथक रूप से अनुच्छेद 233 द्वारा विनियमित है।