Skip to content
सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 186

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते— विधान सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को तथा विधान परिषद् के सभापति और उपसभापति को, ऐसे वेतन और भत्तों का जो राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा, नियत करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतन और भत्तों का जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, संदाय किया जाएगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि राज्य विधान-मंडलों के प्रमुख सभापति पदाधिकारियों को वेतन की गारंटी मिले, ताकि उनकी स्वतंत्रता और गरिमा कार्यपालिका की मनमानी या राजनीतिक दबाव पर निर्भर न रहे। सामान्य कानून के माध्यम से राज्य विधान-मंडल को वेतन तय करने की अनुमति देकर यह समय के साथ (जैसे महँगाई) समायोजन की लचीलेपन देता है, जबकि द्वितीय अनुसूची एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बनी रहती है ताकि विधायी निष्क्रियता के कारण इन पदों को कभी वेतन से वंचित न होना पड़े।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि सभापति का वेतन संविधान द्वारा हमेशा के लिए स्थिर कर दिया गया है और कभी बदला नहीं जा सकता।

    तथ्य: संविधान केवल एक डिफ़ॉल्ट (द्वितीय अनुसूची) राशि प्रदान करता है; राज्य विधान-मंडल अपने कानून द्वारा अलग वेतन और भत्ते निर्धारित कर सकता है।