The Constitution of India
अनुच्छेद 157
राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं
राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं— कोई व्यक्ति राज्यपाल नियुक्त होने का पात्र तभी होगा जब वह भारत का नागरिक है और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान-निर्माताओं ने चाहा कि राज्य में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि और एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के रूप में राज्यपाल का पद ऐसे व्यक्ति के पास हो जिसकी देश के प्रति स्थायी निष्ठा हो और जिसमें न्यूनतम परिपक्वता व जीवन-अनुभव हो। नागरिकता की शर्त अन्य उच्च संवैधानिक पदों जैसी ही है, जबकि आयु-सीमा (राष्ट्रपति के समान 35 वर्ष) यह सुनिश्चित करती है कि वह व्यक्ति विधेयकों को स्वीकृति देना, मुख्यमंत्री की नियुक्ति करना और कुछ विवेकाधिकार वाले अवसरों में कार्य करना जैसी गंभीर जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए पर्याप्त रूप से परिपक्व हो।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 157 में राज्यपाल बनने के लिए शिक्षा या अनुभव जैसी कई अर्हताएँ सूचीबद्ध हैं।
तथ्य: इसमें केवल भारतीय नागरिकता और न्यूनतम 35 वर्ष आयु की शर्त है; शिक्षा, राजनीतिक अनुभव या अन्य कोई अर्हता का उल्लेख नहीं है।
मिथक: राज्यपाल के लिए आयु-शर्त राष्ट्रपति से अलग है।
तथ्य: राष्ट्रपति (अनुच्छेद 58) और राज्यपाल (अनुच्छेद 157) दोनों के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष समान है।