The Constitution of India
अनुच्छेद 130
उच्चतम न्यायालय का स्थान
उच्चतम न्यायालय का स्थान— उच्चतम न्यायालय दिल्ली में अथवा ऐसे अन्य स्थान या स्थानों में अधिविष्ट होगा जिन्हें भारत का मुख्य न्यायमूर्ति, राष्ट्रपति के अनुमोदन से समय-समय पर, नियत करे ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान बनाते समय यह बहस हुई थी कि क्या भारत के विभिन्न भागों में सर्वोच्च न्यायालय की स्थायी पीठें होनी चाहिए, जैसा कि कुछ देशों में क्षेत्रीय न्यायालयिक आसन होते हैं। निर्माताओं ने लचीलेपन का मार्ग चुना: दिल्ली प्राथमिक आसन होगा, पर आवश्यकता पड़े तो संविधान संशोधन के बिना कहीं और बैठने की संभावना रखी गई। इससे स्थिरता (एक स्पष्ट प्राथमिक स्थान) और अनुकूलनशीलता (परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन की गुंजाइश) में संतुलन बना रहता है, और निर्णय न्यायपालिका के नियंत्रण में रहता है, कार्यपालिका की सहमति (राष्ट्रपति की स्वीकृति) के अधीन।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अनुच्छेद 130 की व्याख्या करने वाला महत्वपूर्ण न्यायनिवेदन लगभग नहीं है, क्योंकि इसके तहत दी गई शक्ति का वस्तुतः कभी उपयोग नहीं हुआ। सर्वोच्च न्यायालय हमेशा दिल्ली में ही बैठा है। फिर भी, दूरदराज़ के वादकारियों के लिए न्याय तक पहुँच सुधारने हेतु सर्वोच्च न्यायालय की क्षेत्रीय पीठें बनाने पर सार्वजनिक बहसों और संसदीय चर्चाओं में यह अनुच्छेद कभी‑कभी उभरता है। न्यायालयों और टिप्पणीकारों ने उल्लेख किया है कि सिद्धांततः अनुच्छेद 130 ऐसी पीठों की अनुमति दे सकता है, पर इसके लिए मुख्य न्यायाधीश का निर्णय और राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होगी—और अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कथन गलत है: सर्वोच्च न्यायालय की दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में कोई शाखाएँ/पीठें पहले से नहीं हैं।
तथ्य: वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय केवल दिल्ली में बैठता है; अनुच्छेद 130 के अंतर्गत अन्यत्र बैठने की शक्ति का कभी उपयोग नहीं हुआ है।
मिथक: संसद सर्वोच्च न्यायालय को किसी नए शहर में बैठने का आदेश दे सकती है—यह कथन गलत है।
तथ्य: इस अनुच्छेद के तहत निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश का होता है, राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ—संसद का नहीं।