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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 59

repealed

Transportation instead of imprisonment.

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

धारा 59 के तहत मूलतः अदालतें ‘ट्रांसपोर्टेशन’ (दोषियों को दंड-उपनिवेशों, जैसे अंडमान द्वीप, भेजना) का आदेश साधारण कारावास के विकल्प के रूप में दे सकती थीं। स्वतंत्रता के बाद भारत की दंड-नीति विकसित हुई तो यह दंड कालबाह्य हो गया, क्योंकि आजीवन कारावास और IPC व Cr.P.C. के अन्य सज़ा-विकल्प वही उद्देश्य पूरा करते थे। औपनिवेशिक काल की पुरानी सज़ा-व्यवस्था को हटाकर दंड-विधान को सरल करने हेतु संसद ने 1955 में इस धारा को निरस्त कर दिया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: धारा 59 आज भी भारतीय क़ानून का हिस्सा है और अदालतें इसे वर्तमान में लागू कर सकती हैं।

    तथ्य: इसे 1955 में निरस्त कर दिया गया था और अब इसका कोई विधिक प्रभाव नहीं है; अदालतें इसे लागू नहीं कर सकतीं।

  • मिथक: इस धारा में ‘ट्रांसपोर्टेशन’ का अर्थ कैदियों को एक जेल से दूसरी जेल में ले जाना है।

    तथ्य: इसका तात्पर्य दोषियों को दूरस्थ दंड-उपनिवेशों (जैसे अंडमान) में निर्वासित करना था, जो साधारण कारावास से भिन्न एक अलग दंड था।