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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 502

repealed

Sale of printed or engraved substance containing defamatory matter

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान मानहानि के प्रसार की ज़िम्मेदारी को उन वितरकों और विक्रेताओं तक बढ़ाता है—जैसे पुस्तक-विक्रेता, फेरीवाले या समाचार-स्टॉल—जो जानबूझकर मानहानिकारक सामग्री वाले पदार्थ बेचते हैं। यह उस कमी को भरता है जिसके कारण अन्यथा विक्रेता यह कहकर मानहानिकारक प्रकाशनों के प्रसार से लाभ कमा सकते थे कि वे लेखक या मुद्रक नहीं हैं, बशर्ते यह सिद्ध हो जाए कि उन्हें सामग्री के मानहानिकारक होने का ज्ञान था।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि पुस्तक-विक्रेताओं और फेरीवालों को उस मानहानिकारक सामग्री के लिए कभी ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जिसे उन्होंने लिखा नहीं है।

    तथ्य: यदि कोई विक्रेता यह जानते हुए भी मानहानिकारक सामग्री वाला पदार्थ बेचता है, तो भले ही उसने उसे लिखा या मुद्रित न किया हो, उसके विरुद्ध इस धारा के तहत अभियोजन चलाया जा सकता है।