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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 474

repealed

Having possession of document described in section 466 or 467, knowing it to be forged and intending to use it genuine

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा उस क्षण को लक्ष्य करती है जब जाली दस्तावेज़ के वास्तविक प्रयोग से ठीक पहले व्यक्ति पकड़ा जाता है—यदि कोई नकली न्यायालय अभिलेख या रजिस्टर हाथ में पकड़ा जाए और साफ़ दिखाई दे कि वह उसे असली बताकर चलाने वाला है, तो भले ही उसने अभी तक उसका प्रयोग न किया हो, उस पर अभियोजन चल सकता है; इससे वह खाई भर जाती है जिसके कारण लोग केवल “अभी तक इस्तेमाल नहीं किया” कहकर बच निकलते। IPC को 01 July 2024 को निरस्त कर दिया गया और उसके स्थान पर Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 लागू हुई, जो अब इन अपराधों को शासित करती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: आपको तभी दंडित किया जा सकता है जब आप वास्तव में जाली दस्तावेज़ का प्रयोग कर लें।

    तथ्य: इस प्रकार के जाली दस्तावेज़ का मात्र कब्जा, उसके नकली होने का ज्ञान, और उसे असली बताकर प्रयोग करने की मंशा—ये सब मिलकर अभियोजन के लिए पर्याप्त हैं; वास्तविक प्रयोग आवश्यक नहीं।