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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 430

repealed

Mischief by injury to works of irrigation or by wrongfully diverting water

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जल कृषि, स्वास्थ्य और उद्योग—सभी के लिए अनिवार्य है, और इसकी आपूर्ति में व्यवधान का असर केवल व्यक्तियों पर नहीं बल्कि पूरे समुदायों पर पड़ता है। यह धारा मानती है कि जलापूर्ति में जानबूझकर या जानते-बूझते हस्तक्षेप विशेष रूप से गंभीर हानि पहुंचाता है, इसलिए साधारण संपत्ति-नुकसान वाली शरारत की तुलना में कठोर दंड उचित है। भारतीय दंड संहिता-परिवर्तित विधि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) के अंतर्गत यह धारा 326 के समतुल्य है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें यह प्रमाण मांगती हैं कि अभियुक्त के कृत्य से निर्दिष्ट आवश्यक प्रयोजनों—कृषि, मनुष्यों या पशुओं के भोजन/पेय, स्वच्छता, या विनिर्माण—के लिए जलापूर्ति में कमी हुई, या होने की संभावना वह जानता था; इसी से इसे पूर्ववर्ती धाराओं की सामान्य शरारत से अलग पहचाना जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल सरकारी ढांचे से जुड़ी बड़े पैमाने की जल-विवादों पर ही लागू होती है—यह कथन गलत है।

    तथ्य: यह व्यापक रूप से उन सभी कृत्यों पर लागू होती है जिनसे, या जिनसे होने की संभावना ज्ञात हो, सूचीबद्ध आवश्यक प्रयोजनों—कृषि, मनुष्यों या पशुओं के भोजन/पेय, स्वच्छता, या विनिर्माण—के लिए जलापूर्ति में कमी आती है, चाहे विवाद व्यक्तिगत किसानों, गाँववालों के बीच हो या बड़े पक्षों के बीच।