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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 428

repealed

Mischief by killing or maiming animal of the value of ten rupees

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा विशेष रूप से पशुओं को जानबूझकर पहुँचाई गई हानि को शरारत (मिसचीफ़) के रूप में दंडित करती है, यह मानते हुए कि पशु—चाहे वे पशुधन हों, कार्यकारी पशु हों या पालतू—अक्सर अपने स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक मूल्य रखते हैं, और उन्हें हानि पहुँचाने से साधारण संपत्ति-नुकसान से अलग प्रकार की क्षति होती है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में इसका समतुल्य प्रावधान धारा 325 है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें यह प्रमाण चाहती हैं कि जिस पशु को क्षति पहुँची उसका मूल्य कम-से-कम दस रुपये था—यह एक न्यून सीमा है जो व्यवहार में लगभग सभी वास्तविक मूल्य वाले पशुओं को आच्छादित कर देती है—साथ ही शरारत (मिसचीफ़) के साधारण तत्व, अर्थात् उद्देश्य या संभावित हानि का ज्ञान, भी सिद्ध होना चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल महँगे पालतू पशुओं या पशुधन जैसे मूल्यवान पशुओं की ही रक्षा करती है—यह कथन गलत है।

    तथ्य: क्योंकि न्यूनतम मूल्य-सीमा मात्र दस रुपये है, यह धारा व्यवहार में लगभग हर वास्तविक मूल्य वाले पशु को आच्छादित कर लेती है; केवल महँगे या दुर्लभ पशुओं तक इसकी सीमा नहीं है।