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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 418

repealed

Cheating with knowledge that wrongful loss may ensue to person whose interest offender is bound to protect

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा धोखाधड़ी के अधिक गंभीर रूप से संबंधित है, जहाँ अपराधी पर जिस व्यक्ति को छल से हानि पहुँचाई गई है उसकी रक्षा करने का विशेष वैधानिक या संविदात्मक दायित्व था—जैसे अभिभावक, न्यासी या अभिकर्ता। ऐसे संरक्षणात्मक संबंध के साथ विश्वासघात साधारण धोखाधड़ी से बढ़कर अपराध बनता है, इसलिए कानून धारा 417 के मूल अपराध की तुलना में कड़ा दंड निर्धारित करता है। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में इसका समतुल्य प्रावधान धारा 318(3) है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालय साधारण धोखाधड़ी के सामान्य तत्त्वों के साथ-साथ यह भी प्रमाण मांगते हैं कि पीड़ित के हितों की रक्षा का एक विशिष्ट वैधानिक या संविदात्मक दायित्व मौजूद था; इसी आधार पर इसे उन मामलों से अलग किया जाता है जहाँ पक्षों के बीच ऐसा कोई विशेष संरक्षणात्मक संबंध नहीं होता।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा परिवार के सदस्यों के बीच होने वाली हर प्रकार की धोखाधड़ी पर लागू नहीं होती।

    तथ्य: यह विशेष रूप से तभी लागू होती है जब अपराधी पर लेन-देन में पीड़ित के हितों की रक्षा का विधिक या संविदात्मक दायित्व था; केवल आपसी रिश्तेदारी होना पर्याप्त नहीं है।