Indian Penal Code, 1860
धारा 371
repealedHabitual dealing in slaves
Whoever habitually imports, exports, removes, buys, sells traffics or deals in slaves, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term not exceeding ten years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह भारतीय दंड संहिता का एक पुराना प्रावधान है, जो उन्नीसवीं सदी में प्रचलित दास‑व्यापार के प्रति चिंता को दर्शाता है, और यह किसी एक पृथक कृत्य के बजाय गुलामों के साथ आदतन व बार‑बार किए जाने वाले लेन‑देन को विशेष रूप से निशाना बनाता है। आज व्यवहार में इसका दायरा काफी हद तक धारा 370 की आधुनिक मानव‑तस्करी रूपरेखा में समाहित हो गया है, जो दासता‑सदृश शोषण को व्यापक रूप से कवर करती है और अधिक सामान्यतः प्रयुक्त होती है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 ने भी ऐसे आचरण को पृथक ‘गुलामों से आदतन लेन‑देन’ वाले अपराध के रूप में रखने के बजाय अपनी व्यापक तस्करी संबंधी धाराओं में समेट लिया है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
चूंकि आधुनिक दासता और बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों का अभियोजन अब आमतौर पर धारा 370 जैसी तस्करी संबंधी धाराओं के अंतर्गत होता है, न्यायालय इस विशिष्ट ऐतिहासिक धारा का विरले ही उपयोग करते हैं, यद्यपि व्यापार के लिए व्यक्तियों को गुलाम की भांति बरतने पर निहित निषेध अब भी विधि‑व्यवस्था का हिस्सा है।