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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 327

repealed

Voluntarily causing hurt to extort property, or to constrain to an illegal to an act

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा उस चोट को संबोधित करती है जो एक विशेष दबावकारी उद्देश्य से पहुँचाई जाती है—धन या संपत्ति की उगाही करने के लिए, या अवैध आचरण के लिए बाध्य करने के लिए—और इसे साधारण चोट से अधिक गंभीर मानती है क्योंकि हिंसा का प्रयोग पीड़ित से एक खास नतीजा जबरन लेने के साधन के रूप में होता है। यह दर्शाता है कि कानून को उगाही या जबरदस्ती के औज़ार के रूप में की गई हिंसा से विशेष चिंता है, जो ग़ुस्से में या आकस्मिक झगड़े में हुई चोट से अलग है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) के अंतर्गत, यह अपराध अब धारा 119(1) में समाहित है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल सुरक्षा-शुल्क वसूलने वाले संगठित आपराधिक गिरोहों पर ही लागू होती है।

    तथ्य: यह किसी भी व्यक्ति पर लागू होती है जो विशेष रूप से संपत्ति की उगाही करने या अवैध आचरण के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से चोट पहुँचाता है—चाहे वह संगठित गिरोह हो, कोई साहूकार हो, या निजी विवाद का पक्षकार अकेला व्यक्ति।