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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 218

repealed

Public servant framing incorrect record or writing with intent to save person from punishment or property from forfeiture

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

औपनिवेशिक काल के विधि-निर्माताओं का उद्देश्य था कि सरकारी अभिलेख—अदालती कागज़ात, पुलिस डायरी, राजस्व रजिस्टर और ऐसे अन्य दस्तावेज़—विश्वसनीय बने रहें। कोई लोक सेवक यदि जानबूझकर अभिलेख में हेरफेर करता है, तो वह न्याय और प्रशासन की पूरी व्यवस्था को कमजोर करता है, क्योंकि न्यायालय और नागरिक ऐसे अभिलेखों की शुद्धता पर निर्भर रहते हैं। यह धारा, लोक सेवकों के दुराचार से जुड़ी आईपीसी (IPC) की प्रावधान-श्रृंखला (धारा 166–223) का भाग है और विशेष रूप से उन अभिलेख-रखैयों को निशाना बनाती है जो सच को तोड़-मरोड़कर अपराधियों की रक्षा करते हैं या दूसरों को नुकसान पहुँचाते हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल पुलिस अधिकारियों पर लागू होती है।

    तथ्य: यह किसी भी ऐसे लोक सेवक पर लागू होती है जिसके कर्तव्यों में अभिलेख या आधिकारिक लेखन तैयार करना शामिल है—इसमें लिपिक, राजस्व अधिकारी, रजिस्ट्रार और अन्य शामिल हो सकते हैं, केवल पुलिस ही नहीं।

  • मिथक: किसी आधिकारिक अभिलेख में साधारण भूल या टाइपो इस धारा के तहत दंडनीय है।

    तथ्य: इस धारा के लिए आवश्यक है कि लोक सेवक को पता हो कि अभिलेख गलत है और वह आशयपूर्वक या संभावित हानि के ज्ञान के साथ ऐसा कर रहा है—सच्ची, अनजानी भूलें इस मानक पर खरी नहीं उतरतीं।