संसद ने ऐसा विधेयक पारित किया जिसका उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में संगठित नकल को रोकना है, यह एक ऐसी लगातार बनी रहने वाली समस्या है जिसके कारण हाल के वर्षों में बार-बार भर्ती परीक्षाएँ रद्द हुई हैं और जनता में आक्रोश फैला है। रिपोर्ट के अनुसार यह विधेयक विपक्ष के सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) के बीच पारित हुआ, हालाँकि विरोध के विशिष्ट कारणों का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया है।
यह उपाय शासन-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा की शुचिता लाखों अभ्यर्थियों तथा केंद्र और राज्य एजेंसियों द्वारा संचालित भर्ती प्रक्रियाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित करती है। ऐसे कानून सामान्यतः लीक-संबंधी अपराधों को दंडनीय बनाने और संगठित गिरोहों पर कठोर दंड लगाने का प्रयास करते हैं।
परीक्षाओं की दृष्टि से यह शासन-व्यवस्था तथा असुरक्षित/अभ्यर्थी समूहों के कल्याण के अंतर्गत एक सामयिक विषय है, जो परीक्षा संबंधी कदाचार के प्रति विधायी प्रतिक्रिया और संघ सूची (यूनियन लिस्ट) के अंतर्गत संसद की विधि-निर्माण भूमिका की जानकारी की परीक्षा लेता है।