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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 444

Option of Court to hear parties

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

पुनरीक्षण का उद्देश्य एक अपेक्षाकृत त्वरित निगरानी-जांच है, पूर्ण अपील जैसा विस्तृत पुनर्विचार नहीं; इसलिए पक्षकारों को अपनी दलीलें विस्तार से रखने का स्वचालित हक नहीं मिलता। इससे पुनरीक्षण प्रक्रिया कुशल रहती है, और साथ ही न्यायालयों को यह लचीलापन बना रहता है कि न्यायसंगतता या मुद्दे की जटिलता माँगे तो वे पक्षों को सुन लें। यह पहले के CrPC की धारा 403 के अनुरूप है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

आम तौर पर, जब किसी आदेश से किसी को प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो, तो न्यायालय सुनवाई करने के अपने विवेक का उदारतापूर्वक प्रयोग करते हैं; और पिछले उपखंड (अभिलेख तलब करने) के अंतर्गत किसी भी प्रतिकूल आदेश से पहले सुनवाई की अपेक्षा को स्वयं संहिता द्वारा निर्मित एक महत्त्वपूर्ण अपवाद माना जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: पुनरीक्षण कार्यवाही में किसी भी व्यक्ति को सामान्य अपील की तरह स्वतः पूर्ण सुनवाई नहीं मिलती।

    तथ्य: पुनरीक्षण के दौरान किसी पक्ष को सुने जाने का स्वचालित अधिकार नहीं है; किसी पक्ष को व्यक्तिगत रूप से या अधिवक्ता के माध्यम से सुनना है या नहीं, यह न्यायालय अपने विवेक से तय करता है।