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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 333

Authorities before whom affidavits may be sworn

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 297 का यह प्रावधान उन स्पष्ट प्राधिकारियों को स्थापित करता है जिन्हें हलफ़नामों पर शपथ दिलाने का अधिकार है, और यह आवश्यकता भी तय करता है कि हलफ़नामों में व्यक्तिगत जानकारी और विश्वास में भेद साफ़-साफ़ हो, ताकि इस अध्याय में अन्यत्र वर्णित सरलीकृत हलफ़नामा प्रक्रिया में प्रयुक्त शपथपूर्ण साक्ष्य की निष्कलंकता सुरक्षित रहे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: न्यायालय हलफ़नामे में मौजूद किसी भी कुत्सित या अप्रासंगिक विषयवस्तु को निकाल देने या संशोधित करने का आदेश दे सकता है।

    तथ्य: जब एक गवाह को प्रचलित आपराधिक कार्यवाही के समर्थन में शपथपूर्वक हलफ़नामा प्रस्तुत करना था, तो वह Notaries Act के अधीन नियुक्त स्थानीय अभिसाक्षी (नोटरी) के पास गई—ऐसी ही एक प्राधिकारी जिसे यह अनुभाग विशेष रूप से ऐसी शपथ दिलाने की अनुमति देता है। अभिसाक्षी के सामने बैठकर उसने अपना कथन सावधानी से व्यवस्थित किया: कुछ तथ्य, जैसे कि उस रात उसने स्वयं जो देखा था, उसने प्रथम-हस्त जानकारी के रूप में सुस्पष्ट लिखे। किंतु एक विवरण—कि पड़ोसी ने बाद में किसी तीसरे व्यक्ति से क्या कहा था—वह केवल विश्वास के रूप में ही कह सकती थी, और इस अनुभाग के अनुसार उसे यह स्पष्ट बताना और अपने विश्वास का आधार समझाना आवश्यक था। जब हलफ़नामा न्यायालय पहुँचा, तो न्यायाधीश ने एक अनुच्छेद देखा जो अभियुक्त के परिवार के बारे में असंबद्ध, अपमानजनक टिप्पणी करता था और जिसका मामले से कोई लेना-देना नहीं था; न्यायाधीश ने उसे कुत्सित और अप्रासंगिक मानते हुए तुरंत निकाल देने का आदेश दिया। जो शेष रहा, वह एक स्वच्छ, ईमानदार, विधिवत् शपथित दस्तावेज़ था—ठीक वैसा जैसा विधि कल्पित करती है—जिसमें ज्ञान और विश्वास का भेद स्पष्ट था और अनावश्यक कलंक-उछाल से मुक्त था।