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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 258

Judgment of acquittal or conviction

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

इससे यह सुनिश्चित होता है कि मुकदमे समय पर समाप्त हों और निर्णय अनिश्चितकाल तक सुरक्षित न रखे जाएँ—जो भारत की अदालतों के बारे में एक आम शिकायत रही है; देरी कम करने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNSS) में 30/45 दिन की समय-सीमा नया प्रावधान है। यह उस आधारभूत सिद्धांत की भी रक्षा करता है कि दंड का निर्धारण दोष सिद्ध होने के साथ ही उसी क्षण नहीं किया जाना चाहिए: सज़ा से पहले अभियुक्त को नरमी के लिए अलग सुनवाई मिलनी चाहिए। यह पहले की आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 235 के अनुरूप है, जिसमें अब नई समय-सीमा जोड़ी गई है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: न्यायाधीश दोष और सज़ा—दोनों का निर्णय एक ही क्षण में करता/करती है।

    तथ्य: दोषसिद्धि के बाद सज़ा निर्धारण के लिए अलग सुनवाई आवश्यक होती है, जिसमें अभियुक्त हल्की सज़ा के लिए दलील दे सकता है।