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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 248

Trial to be conducted by Public Prosecutor

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सत्र न्यायालय में होने वाले गंभीर आपराधिक मुकदमे समाज की ओर से अपराध का अभियोजन करने में राज्य के हित से जुड़े होते हैं, न कि केवल पीड़ित के निजी हित से। यह धारा सुनिश्चित करती है कि ऐसे मुकदमों का संचालन सरकार द्वारा नियुक्त लोक अभियोजक करे, जो न्याय के हित में निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अपेक्षा रखता है, न कि केवल शिकायतकर्ता के निजी हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले निजी अधिवक्ता की तरह।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

उसी आशय के पहले प्रावधान (CrPC धारा 225) के तहत, न्यायालयों ने जोर देकर कहा है कि लोक अभियोजक का दायित्व अदालत की सत्य तक पहुँचने और न्याय करने में सहायता करना है, मात्र दोषसिद्धि कराना नहीं — जो यह दर्शाता है कि उसका व्यापक लोकहितकारी दायित्व निजी रूप से नियुक्त वकील की भूमिका से भिन्न है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: सत्र न्यायालय के मुकदमे में पीड़ित परिवार किसी भी वकील को शामिल ही नहीं कर सकता, ऐसा नहीं है।

    तथ्य: पीड़ित का परिवार सहायता और सुझाव देने हेतु निजी वकील नियुक्त कर सकता है, लेकिन कानून के अनुसार अभियोजन का वास्तविक संचालन लोक अभियोजक द्वारा ही किया जाना चाहिए।